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Do padosiyon ke madhya hue vivad ko samvad ke roop mein likhiye – Samvad Lekhan

नितीश : अरे रजत ! तुम यह कूड़े का थैला रोज बाहर क्यों रख देते हो ?

रजत : क्यों इस कूड़े के थैले से तुम्हे क्या दिक्कत है ?

नितीश : दिक्कत यह है कि रोज कोई न कोई कुत्ता या गाय इस कूड़े को यहाँ-वहाँ फैला देते हैं और घर के बाहर फैला हुआ कूड़ा क्या अच्छा लगता है ?

रजत : अब यदि कूड़े वाला नहीं ले जाता है तो मैं क्या करूँ ?

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नितीश : अरे, जब कूड़े वाला आता है तब उसे कूड़ा दिया करो । ऐसे पहले से ही बाहर क्यों रख देते हो जानवरों के लिए ? सारी सड़क पर कूड़ा फ़ैल जाता है और गाड़ियाँ उस पर चलती हैं तो और भी गन्दा हो जाता है।

रजत : जब वह आता है तब हम व्यस्त होते हैं ।

नितीश : यदि उस समय तुम व्यस्त होते हो तो कूड़ा ऊपर रखने का कोई तरीका सोचो । तुम अपने गेट पर या दीवार पर बाहर की तरफ कोई डब्बा क्यों नहीं लटका देते जिससे कूड़े का थैला उसमे रखा जा सके । देखो मुझे तुमसे कोई दुश्मनी तो है नहीं पर जिस काम से पड़ोसियों को दिक्कत हो उसका उपाय तो निकाला ही जा सकता है ना ।

रजत : तुम सही कह रहे हो नितीश ।मेरी वजह से जो दिक्कत हुई है उसके लिए मैं क्षमा चाहता हूँ और मैं आज ही यहाँ कूड़े के लिए डब्बा लगवाता हूँ ।

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