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Do yuvtiyon ke madhye khaana pakane ko lekar samvad- Samvad Lekhan

केतकी : चारुक्या बना रही हो आज खाने में ?

चारु : बच्चे बोल रहे थे बहुत दिनों से कुछ अच्छा नहीं खाया तो मलाई कोफ्ता बना कर आई हूँ ।

केतकी : सच में समझ ही नहीं आता कि आखिर रोज-रोज क्या खाना पकाया जाये ?

चारु : यही तो । खाना पकाने से ज्यादा बड़ा काम तो यह है कि आखिर पकाया क्या जाये ?

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केतकी : सुबह का नाश्ता निपटाओ तो दिन की खाने की चिंता और शाम को चाय पीकर हटे नहीं कि फिर वही रात के खाने की चिंता ।

चारु : मेरा तो कभी-कभी दिमाग खराब हो जाता है दिन भर खाने की सोचते-सोचते ।

केतकी : और यहाँ घरवालों की फरमाइश ही पूरी नहीं होती ।

चारु : अरे छुट्टियों में तो और भी बुरा हाल हो जाता है । नाश्ता भी स्पेशल चाहिए, दिन और रात का खाना भी ।

केतकी : सबके घर का यही हाल है । छुट्टी से एक दिन पहले ही सब शुरू हो जायेंगे कल नाश्ते में क्या बनेगा और खाने में क्या बनेगा ?

चारु : सब की छुट्टी हो सकती है, बस एक खाना बनाने वाले की नहीं ।

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केतकी : सही में, खाना पकाना भी अपने आप में एक फुल टाइम जॉब ही है ।

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