दुष्यंत कुमार Shayari in Hindi बहुत सँभाल के रक्खी तो पाएमाल हुई

Advertisement

Dushyant Kumar shayari – Bahut Sambhaal Ke Rakkhi To Paayemal Hui

बहुत सँभाल के रक्खी तो पाएमाल हुई
सड़क पे फेंक दी तो ज़िंदगी निहाल हुई

बड़ा लगाव है इस मोड़ को निगाहों से
कि सबसे पहले यहीं रौशनी हलाल हुई

Advertisement

कोई निजात की सूरत नहीं रही, न सही
मगर निजात की कोशिश तो एक मिसाल हुई

मेरे ज़ेह्न पे ज़माने का वो दबाब पड़ा
जो एक स्लेट थी वो ज़िंदगी सवाल हुई

Advertisement
youtube shorts kya hai

समुद्र और उठा, और उठा, और उठा
किसी के वास्ते ये चाँदनी वबाल हुई

उन्हें पता भी नहीं है कि उनके पाँवों से
वो ख़ूँ बहा है कि ये गर्द भी गुलाल हुई

मेरी ज़ुबान से निकली तो सिर्फ़ नज़्म बनी
तुम्हारे हाथ में आई तो एक मशाल हुई

दुष्यंत कुमार के 25 मशहूर शेर जो आपको सोचने पर कर देंगे मजबूर

Dushyant Kumar Poetry – Bahut Sambhaal Ke Rakkhi To Paayemal Hui

Bahut Sambhaal Ke Rakkhi To Paayemal Hui

saraka pe phenka dee to zindagee nihaala huee

baraa lagaava hai isa mora ko nigaahom se

ki sabase pahale yaheem raushanee halaala huee

koee nijaata kee soorata naheem rahee, na sahee

magara nijaata kee koshisha to eka misaala huee

mere zehna pe zamaane kaa vo dabaaba paraa

jo eka slet’a thee vo zindagee savaala huee

samudra aura ut’haa, aura ut’haa, aura ut’haa

kisee ke vaaste ye chaam’danee vabaala huee

unhem pataa bhee naheem hai ki unake paam’vom se

vo khoom’ bahaa hai ki ye garda bhee gulaala huee

meree zubaana se nikalee to sirfa nazma banee

tumhaare haatha mem aaee to eka mashaala huee

Dushyant Kumar– Bahut Sambhaal Ke Rakkhi To Paayemal Hui (in Urdu)

بَہُتَ سَںبھالَ کے رَکّھِی تو پاءایمالَ ہُئی

سَڑَکَ پے پھیںکَ دِی تو زِںدَگِی نِہالَ ہُئی

بَڑا لَگاوَ ہَے اِسَ موڑَ کو نِگاہوں سے

کِ سَبَسے پَہَلے یَہِیں رَوشَنِی ہَلالَ ہُئی

کوئی نِجاتَ کِی سُورَتَ نَہِیں رَہِی، نَ سَہِی

مَگَرَ نِجاتَ کِی کوشِشَ تو ایکَ مِسالَ ہُئی

میرے زیہْنَ پے زَمانے کا وو دَبابَ پَڑا

جو ایکَ سْلیٹَ تھِی وو زِںدَگِی سَوالَ ہُئی

سَمُدْرَ اَورَ اُٹھا، اَورَ اُٹھا، اَورَ اُٹھا

کِسِی کے واسْتے یے چاںدَنِی وَبالَ ہُئی

اُنْہیں پَتا بھِی نَہِیں ہَے کِ اُنَکے پاںووں سے

وو خُوں بَہا ہَے کِ یے گَرْدَ بھِی گُلالَ ہُئی

میرِی زُبانَ سے نِکَلِی تو سِرْفَ نَزْمَ بَنِی

تُمْہارے ہاتھَ میں آئی تو ایکَ مَشالَ ہُئی

Dushyant Kumar– Bahut Sambhaal Ke Rakkhi To Paayemal Hui (in Punjabi)

ਬਹੁਤ ਸਁਭਾਲ ਕੇ ਰੱਖੀ ਤੋ ਪਾਏਮਾਲ ਹੁਈ

ਸੜਕ ਪੇ ਫੇਂਕ ਦੀ ਤੋ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨਿਹਾਲ ਹੁਈ

ਬੜਾ ਲਗਾਵ ਹੈ ਇਸ ਮੋੜ ਕੋ ਨਿਗਾਹੋਂ ਸੇ

ਕਿ ਸਬਸੇ ਪਹਲੇ ਯਹੀਂ ਰੌਸ਼ਨੀ ਹਲਾਲ ਹੁਈ

ਕੋਈ ਨਿਜਾਤ ਕੀ ਸੂਰਤ ਨਹੀਂ ਰਹੀ, ਨ ਸਹੀ

ਮਗਰ ਨਿਜਾਤ ਕੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਤੋ ਏਕ ਮਿਸਾਲ ਹੁਈ

ਮੇਰੇ ਜ਼ੇਹ੍ਨ ਪੇ ਜ਼ਮਾਨੇ ਕਾ ਵੋ ਦਬਾਬ ਪੜਾ

ਜੋ ਏਕ ਸ੍ਲੇਟ ਥੀ ਵੋ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਸਵਾਲ ਹੁਈ

ਸਮੁਦ੍ਰ ਔਰ ਉਠਾ, ਔਰ ਉਠਾ, ਔਰ ਉਠਾ

ਕਿਸੀ ਕੇ ਵਾਸ੍ਤੇ ਯੇ ਚਾਁਦਨੀ ਵਬਾਲ ਹੁਈ

ਉਨ੍ਹੇਂ ਪਤਾ ਭੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਉਨਕੇ ਪਾਁਵੋਂ ਸੇ

ਵੋ ਖ਼ੂਁ ਬਹਾ ਹੈ ਕਿ ਯੇ ਗਰ੍ਦ ਭੀ ਗੁਲਾਲ ਹੁਈ

ਮੇਰੀ ਜ਼ੁਬਾਨ ਸੇ ਨਿਕਲੀ ਤੋ ਸਿਰ੍ਫ਼ ਨਜ਼੍ਮ ਬਨੀ

ਤੁਮ੍ਹਾਰੇ ਹਾਥ ਮੇਂ ਆਈ ਤੋ ਏਕ ਮਸ਼ਾਲ ਹੁਈ

Dushyant kumar shayari, Dushyant kumar quotes in hindi, Dushyant kumar poems, motivational shayari of Dushyant kumar, Dushyant kumar motivational poem, Dushyant kumar muktak, Dushyant kumar ki ghazal

Advertisement