दुष्यंत कुमार Shayari in Hindi लफ़्ज़ एहसास-से छाने लगे, ये तो हद है

Advertisement

Dushyant Kumar shayari – Lafj Ehasaas-Se Chhaane Lage, Ye To Had Hai

लफ़्ज़ एहसास-से छाने लगे, ये तो हद है
लफ़्ज़ माने भी छुपाने लगे, ये तो हद है

आप दीवार गिराने के लिए आए थे
आप दीवार उठाने लगे, ये तो हद है

Advertisement

ख़ामुशी शोर से सुनते थे कि घबराती है
ख़ामुशी शोर मचाने लगे, ये तो हद है

आदमी होंठ चबाए तो समझ आता है
आदमी छाल चबाने लगे, ये तो हद है

Advertisement
youtube shorts kya hai

जिस्म पहरावों में छुप जाते थे, पहरावों में
जिस्म नंगे नज़र आने लगे, ये तो हद है

लोग तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के सलीक़े सीखें
लोग रोते हुए गाने लगे, ये तो हद है

दुष्यंत कुमार के 25 मशहूर शेर जो आपको सोचने पर कर देंगे मजबूर

Dushyant Kumar Poetry – Lafj Ehasaas-Se Chhaane Lage, Ye To Had Hai

lafj ehasaas-se chhaane lage, ye to had hai
lafj maane bhii chhupaane lage, ye to had hai

aap diivaar giraane ke lie aae the
aap diivaar uthaane lage, ye to had hai

khaamushii shor se sunate the ki ghabaraatii hai
khaamushii shor machaane lage, ye to had hai

aadamii honth chabaae to samajh aataa hai
aadamii chhaal chabaane lage, ye to had hai

jism paharaavon men chhup jaate the, paharaavon men
jism nange najr aane lage, ye to had hai

log tahajiib-o-tamaddun ke saliike siikhen
log rote hue gaane lage, ye to had hai

Dushyant Kumar– Lafj Ehasaas-Se Chhaane Lage, Ye To Had Hai (in Urdu)

لَفْزَ ایہَساسَ-سے چھانے لَگے، یے تو ہَدَ ہَے
لَفْزَ مانے بھِی چھُپانے لَگے، یے تو ہَدَ ہَے

آپَ دِیوارَ گِرانے کے لِئے آئے تھے
آپَ دِیوارَ اُٹھانے لَگے، یے تو ہَدَ ہَے

خامُشِی شورَ سے سُنَتے تھے کِ گھَبَراتِی ہَے
خامُشِی شورَ مَچانے لَگے، یے تو ہَدَ ہَے

آدَمِی ہوںٹھَ چَبائے تو سَمَجھَ آتا ہَے
آدَمِی چھالَ چَبانے لَگے، یے تو ہَدَ ہَے

جِسْمَ پَہَراووں میں چھُپَ جاتے تھے، پَہَراووں میں
جِسْمَ نَںگے نَزَرَ آنے لَگے، یے تو ہَدَ ہَے

لوگَ تَہَزِیبَ-او-تَمَدُّنَ کے سَلِیقے سِیکھیں
لوگَ روتے ہُئے گانے لَگے، یے تو ہَدَ ہَے

Dushyant Kumar– Lafj Ehasaas-Se Chhaane Lage, Ye To Had Hai (in Punjabi)

ਲਫ੍ਜ ਏਹਸਾਸ-ਸੇ ਛਾਨੇ ਲਗੇ, ਯੇ ਤੋ ਹਦ ਹੈ
ਲਫ੍ਜ ਮਾਨੇ ਭੀ ਛੁਪਾਨੇ ਲਗੇ, ਯੇ ਤੋ ਹਦ ਹੈ

ਆਪ ਦੀਵਾਰ ਗਿਰਾਨੇ ਕੇ ਲਿਏ ਆਏ ਥੇ
ਆਪ ਦੀਵਾਰ ਉਠਾਨੇ ਲਗੇ, ਯੇ ਤੋ ਹਦ ਹੈ

ਖਾਮੁਸ਼ੀ ਸ਼ੋਰ ਸੇ ਸੁਨਤੇ ਥੇ ਕਿ ਘਬਰਾਤੀ ਹੈ
ਖਾਮੁਸ਼ੀ ਸ਼ੋਰ ਮਚਾਨੇ ਲਗੇ, ਯੇ ਤੋ ਹਦ ਹੈ

ਆਦਮੀ ਹੋੰਠ ਚਬਾਏ ਤੋ ਸਮਝ ਆਤਾ ਹੈ
ਆਦਮੀ ਛਾਲ ਚਬਾਨੇ ਲਗੇ, ਯੇ ਤੋ ਹਦ ਹੈ

ਜਿਸ੍ਮ ਪਹਰਾਵੋੰ ਮੇੰ ਛੁਪ ਜਾਤੇ ਥੇ, ਪਹਰਾਵੋੰ ਮੇੰ
ਜਿਸ੍ਮ ਨੰਗੇ ਨਜਰ ਆਨੇ ਲਗੇ, ਯੇ ਤੋ ਹਦ ਹੈ

ਲੋਗ ਤਹਜੀਬ-ਓ-ਤਮਦ੍ਦੁਨ ਕੇ ਸਲੀਕੇ ਸੀਖੇੰ
ਲੋਗ ਰੋਤੇ ਹੁਏ ਗਾਨੇ ਲਗੇ, ਯੇ ਤੋ ਹਦ ਹੈ

Dushyant kumar shayari, Dushyant kumar quotes in hindi, Dushyant kumar poems, motivational shayari of Dushyant kumar, Dushyant kumar motivational poem, Dushyant kumar muktak, Dushyant kumar ki ghazal

Advertisement