दुष्यंत कुमार Shayari in Hindi ये जो शहतीर है पलकों पे उठा लो यारो

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Dushyant Kumar shayari – Ye Jo Shahatiir Hai Palakon Pe Uthaa Lo Yaaro

ये जो शहतीर है पलकों पे उठा लो यारो
अब कोई ऐसा तरीका भी निकालो यारो

दर्दे—दिल वक़्त पे पैग़ाम भी पहुँचाएगा
इस क़बूतर को ज़रा प्यार से पालो यारो

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लोग हाथों में लिए बैठे हैं अपने पिंजरे
आज सैयाद को महफ़िल में बुला लो यारो

आज सीवन को उधेड़ो तो ज़रा देखेंगे
आज संदूक से वो ख़त तो निकालो यारो

रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनिया
इस बहकती हुई दुनिया को सँभालो यारो

कैसे आकाश में सूराख़ हो नहीं सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो

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लोग कहते थे कि ये बात नहीं कहने की
तुमने कह दी है तो कहने की सज़ा लो यारो

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Dushyant Kumar Poetry – Ye Jo Shahatiir Hai Palakon Pe Uthaa Lo Yaaro

ye jo shahatiir hai palakon pe uthaa lo yaaro
ab koii aisaa tariikaa bhii nikaalo yaaro

darde—dil vakt pe paigaam bhii pahunchaaegaa
is kbootar ko jraa pyaar se paalo yaaro

log haathon men lie baithe hain apane pinjare
aaj saiyaad ko mahafil men bulaa lo yaaro

aaj siivan ko udhedo to jraa dekhenge
aaj sandook se vo kht to nikaalo yaaro

rahanumaaon kii adaaon pe fidaa hai duniyaa
is bahakatii huii duniyaa ko sanbhaalo yaaro

kaise aakaash men sooraakh ho nahiin sakataa
ek patthar to tabiiyat se uchhaalo yaaro

log kahate the ki ye baat nahiin kahane kii
tumane kah dii hai to kahane kii sajaa lo yaaro

Dushyant Kumar– Ye Jo Shahatiir Hai Palakon Pe Uthaa Lo Yaaro (in Urdu)

یے جو شَہَتِیرَ ہَے پَلَکوں پے اُٹھا لو یارو
اَبَ کوئی اَیسا تَرِیکا بھِی نِکالو یارو

دَرْدے—دِلَ وَقْتَ پے پَیغامَ بھِی پَہُںچاءایگا
اِسَ قَبُوتَرَ کو زَرا پْیارَ سے پالو یارو

لوگَ ہاتھوں میں لِئے بَیٹھے ہَیں اَپَنے پِںجَرے
آجَ سَییادَ کو مَہَفِلَ میں بُلا لو یارو

آجَ سِیوَنَ کو اُدھیڑو تو زَرا دیکھیںگے
آجَ سَںدُوکَ سے وو خَتَ تو نِکالو یارو

رَہَنُماءاوں کِی اَداءاوں پے فِدا ہَے دُنِیا
اِسَ بَہَکَتِی ہُئی دُنِیا کو سَںبھالو یارو

کَیسے آکاشَ میں سُوراخَ ہو نَہِیں سَکَتا
ایکَ پَتّھَرَ تو تَبِییَتَ سے اُچھالو یارو

لوگَ کَہَتے تھے کِ یے باتَ نَہِیں کَہَنے کِی
تُمَنے کَہَ دِی ہَے تو کَہَنے کِی سَزا لو یارو

Dushyant Kumar– Ye Jo Shahatiir Hai Palakon Pe Uthaa Lo Yaaro (in Punjabi)

ਯੇ ਜੋ ਸ਼ਹਤੀਰ ਹੈ ਪਲਕੋੰ ਪੇ ਉਠਾ ਲੋ ਯਾਰੋ
ਅਬ ਕੋਈ ਐਸਾ ਤਰੀਕਾ ਭੀ ਨਿਕਾਲੋ ਯਾਰੋ

ਦਰ੍ਦੇ—ਦਿਲ ਵਕ੍ਤ ਪੇ ਪੈਗਾਮ ਭੀ ਪਹੁਚਾਏਗਾ
ਇਸ ਕਬੂਤਰ ਕੋ ਜਰਾ ਪ੍ਯਾਰ ਸੇ ਪਾਲੋ ਯਾਰੋ

ਲੋਗ ਹਾਥੋੰ ਮੇੰ ਲਿਏ ਬੈਠੇ ਹੈੰ ਅਪਨੇ ਪਿੰਜਰੇ
ਆਜ ਸੈਯਾਦ ਕੋ ਮਹਫਿਲ ਮੇੰ ਬੁਲਾ ਲੋ ਯਾਰੋ

ਆਜ ਸੀਵਨ ਕੋ ਉਧੇਡੋ ਤੋ ਜਰਾ ਦੇਖੇੰਗੇ
ਆਜ ਸੰਦੂਕ ਸੇ ਵੋ ਖਤ ਤੋ ਨਿਕਾਲੋ ਯਾਰੋ

ਰਹਨੁਮਾਓੰ ਕੀ ਅਦਾਓੰ ਪੇ ਫਿਦਾ ਹੈ ਦੁਨਿਯਾ
ਇਸ ਬਹਕਤੀ ਹੁਈ ਦੁਨਿਯਾ ਕੋ ਸਭਾਲੋ ਯਾਰੋ

ਕੈਸੇ ਆਕਾਸ਼ ਮੇੰ ਸੂਰਾਖ ਹੋ ਨਹੀੰ ਸਕਤਾ
ਏਕ ਪਤ੍ਥਰ ਤੋ ਤਬੀਯਤ ਸੇ ਉਛਾਲੋ ਯਾਰੋ

ਲੋਗ ਕਹਤੇ ਥੇ ਕਿ ਯੇ ਬਾਤ ਨਹੀੰ ਕਹਨੇ ਕੀ
ਤੁਮਨੇ ਕਹ ਦੀ ਹੈ ਤੋ ਕਹਨੇ ਕੀ ਸਜਾ ਲੋ ਯਾਰੋ

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