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गौरेया और उसकी पत्नी एक घने जंगल में पीपल के पेड़ पर रहते थे। इस पेड़ पर इतने अधिक पत्ते थे कि वे गर्मी, सर्दी तथा वर्षा से भी बचे रहते थे। दोनों पति-पत्नी दिन भर तो अपने भोजन की तलाश में निकल जाते, शाम होते ही वापस आकर अपने घोंसले में विश्राम करने लगते।

एकता की शक्ति - शिक्षाप्रद कहानी

कुछ दिनों के बाद गौरेया की पत्नी ने अंडे दिए तो दोनों पति-पत्नी बहुत खुश हुए। अपनी पहली संतान की प्रतीक्षा में दोनों ही हर समय खुश नजर आते थे.

परन्तु भाग्य को तो शायद कुछ और ही मंजूर था। प्राणी जो कुछ भी सोचता है वह सब का सब पूरा तो नहीं होता। यही हुआ गौरेया और उसकी पत्नी के साथ, अभी उन अंडों से बच्चे भी नहीं निकल पाए थे कि एक दिन एक हाथी उस पेड़ के नीचे छाया का आनन्द लेने के लिए आ खड़ा हुआ।

कुछ देर बाद उसे भूख ने आ सताया तो उसने पीपल की उसी टहनी को सूंड में लपेट कर नीचे गिरा लिया जिसमें उस गौरेया का घोंसला था, जैसे ही वह टहनी टूटकर नीचे गिरी तो वह घोंसला भी टूट गया, उसमें रखे उनके अंडे भी टूट गए।

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शाम को आकर जैसे ही उन्होंने अपने टूटे हुए घोंसले और अंडों को देखा तो दोनों ही जोर-जोर से रोने लगे।

मगर हाथी को इनके आंसुओं की क्या चिंता थी, उसने तो मजे से अपना पेट भर लिया था। वे दोनों अपने बच्चों के लिए रो रहे थे। उन्हें रोते देखकर उस पीपल पर रहने वाला एक कौआ आया। उसने कहा, ”भैया गौरेया! रोने से कुछ नहीं होगा, इस समय जरूरत है साहस की।“

”दोस्त! आप हमें कोई ऐसा रास्ता बताओ जिससे हम इस हाथी से अपने बच्चों की हत्या का बदला चुका सकें।“

”हां, अब हमें सबसे पहले इस हाथी के बच्चे को सबक सिखाना है कि किसी के बच्चों की हत्या की क्या सजा मिलती है। मुझे यह भी पता है कि यह हाथी बहुत शक्तिशाली है, हम इससे सीधे तो टकरा नहीं सकते, हमें बुद्धि के सहारे ही इस हाथी से बदला लेना होगा।

अब रोना-धोना छोड़ो, मेरी एक पुरानी मित्र है-मधुमक्खी, ऐसे अवसर पर मित्र ही मित्र के काम आ सकते हैं। सच्चा मित्र वही है जो दुख के समय काम आए। मैं तुम्हें अपनी उस मित्र के पास ले चलता हूं, मधुमक्खी की बुद्धि बहुत तेज होती है, वही हमें इस हाथी से बदला लेने का कोई रास्ता सुझाएगी।“

”हां….हां…. भाई, चलो। अब तो इस दुष्ट हाथी से बदला लिए बिना हमें चैन न आएगां“

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वे तीनों मिलकर मधुमक्खी के पास पहुंचे, कौए ने उसे गौरेया की दर्द भरी कहानी सुना दी। गौरेया और उसकी पत्नी अब भी रो रहे थे।

मधुमक्खी ने पूरी बात सुनकर कहा- ”तुम लोग रोना-धोना छोड़ो, अब मैं उस हाथी के बच्चे को ऐसा सबक पढ़ाऊंगी कि वह सारी उम्र याद करेगा।“

”मगर उस हाथी से तुम कैसे टकराओगी बहन?“ गौरेया ने पूछा।

”देखो, मैं हाथी के कान में जाकर अपनी सुरीली आवाज की वीणा बजाऊंगी, जिससे हाथी मस्त होकर झूमने लगेगा। झूमते हुए मस्त हाथी की दोनों आंखें कौआ अपनी चोंच से फोड़ देगा, जिससे हाथी अंधा हो जाएगा और जब मैं उसके पास जाकर सहानुभूति दिखाकर उसे सुझाऊंगी कि भइया!

यहां से कुछ दूर ऐसा वृक्ष है जिसके पत्तों का रस आंखों से छुआ देने से तुम्हारी आंखें अच्छी हो जाएंगी… ऐसा कहने पर वह मुझे अपना हितैषी समझेगा और मेरे साथ चलने को राजी हो जाएगा, तब मैं उसे किसी गहरे गड्ढे की तरफ ले जाऊंगी… इस प्रकार हाथी उसमें गिर जाएगा और उस गहरे गड्ढे से अंधे हाथी का निकलना संभव नहीं होगा, बस वहां से वह सीधा नर्क में ही पहुंचेगा।“

गौरेया और उसकी पत्नी, मधुमक्खी की यह योजना सुनकर बहुत खुश हुए। कोई छोटा जानवर किसी विशालकाय जानवर को मार दे, इस बात की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।

मधुमक्खी ने जो कहा था उसे करके भी दिखा दिया, हाथी से बदला लेने के लिए उसने उसे मृत्यु के आगोष में पहुंचा दिया। गौरेया और उसकी पत्नी बहुत खुश थे।

मधुमक्खी ने उनसे कहा कि यदि तुम्हें इस बार अंडे देने हैं तो उसी वृक्ष पर आकर देना, जिस वृक्ष पर हमने अपना छत्ता लगा रखा है।

कुछ मास के बाद गौरेया की पत्नी ने फिर अंडे दिए तो मधुमक्खियों उनकी रक्षा करती रहीं। कुछ दिन बाद अंडों से बच्चे निकले तो दोनों पति-पत्नी पुराने दुख को भूल गए, उन्होंने अपने मित्र कौए को भी बहुत धन्यवाद दिया।

 

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