महंगाई पर निबंध – Mahngai Essay in Hindi

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Mahngaai par nibandh – Essay on mahngaai in Hindi

महंगाई एक ऐसा शब्द है, जो हर देश की अर्थव्यवस्था में उतार चढ़ाव लाता है और इंसान की आजीविका को प्रभावित करता है। बीस पच्चीस साल पहले भी महंगाई थी, पर अब यह समस्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है।

आज वस्तु के दाम कई गुना बढ़ गये हैं। आम आदमी के लिये तो दो वक्त पेट भरना भी कठिन हो गया है।

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Essay on mehngai inn Hindiयूँ तो मध्यम वर्ग या निम्न मध्यम वर्ग की आमदनी भी कई गुना बढ़ गयी है, पर चीजों की कीमतों की तुलना में वह बहुत कम है। हर वस्तु की कीमतें इस समय आसमान छू रही हैं।

महंगाई को लेकर समय समय पर सरकारी कर्मचारी हड़तालें और आन्दोलन करते हैं। सरकार वेतन तथा महंगाई भत्ते बढ़ाते हैं, पर वह ऊँट के मुंह में जीरे के समान होता है।

आये दिन हम समाचार पत्रों में किसानों द्वारा आत्महत्या के समाचार पढ़ते हैं या व्यापारियों द्वारा सपरिवार आत्महत्या की खबरें सुनायी देती हैं। ये सब इस महंगाई के ही दुष्परिणाम हैं। इस मंहगाई में अपना खर्च चलाना कठिन होता जा रहा है।

महंगाई के पीछे कई कारण हैं जिनमें जनसंख्या वृद्धि, सामान की माँग का बढ़ाना, चीजों की कमी, भ्रष्टाचार, अनुचित वितरण व्यवस्था आदि शामिल हैं।

सरकार को गरीबी रेखा से नीचे जीने वाले लोगों की मदद के लिये अतिरिक्त सहायता का प्रबन्ध करना चाहिये। कृत्रिम रूप से महंगाई बढ़ाने के दोषी लोगों को कठोर दण्ड दिया जाना जरूरत है। मुनाफाखोरी, कालाबाजारी करने वालों पर नजर रखी जानी चाहिये। इसके लिये जनता का जागरूक रहना भी जरूरी है।

Essay on inflation in Hindi – mahngai par Nibandh

मूल्य वृद्धि की समस्या – महँगाई

वस्तुओं की कीमतों में निरन्तर वृद्धि से एक ऐसी चिन्ताजनक स्थिति उत्पन्न हो गयी है, जिसका विकल्प निकट भविष्य में दिखाई नहीं दे रहा है। स्वतन्त्रता से पूर्व हमारे देश में मूल्य वृद्धि की इतनी भयावह स्थिति नहीं थी, जितनी आज हो गयी है। उस समय जो वस्तुओं की कीमतें थी। वे सर्वसाधारण के लिए कोई दुख का कारण नहीं था। सभी सहजता के साथ जीवन को आनन्दपूर्वक बिता रहे थे। यद्यपि उस समय भी वस्तुओं की मूल्य वृद्धि हो रही थी। उससे जीवन रथ को आगे बढ़ाने में कोई बाधा नहीं दिखाई देती थी। इसके विपरित आज का जीवन पथ तो वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि होने से काँटों के समान चुभने वाला हो गया है।

अब प्रश्न है कि आज वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होने का क्या कारण हैं? वस्तुओं की कीमतें इतनी तीव्र गति से क्यों बढ़ रही हैं? अगर इन्हें रोकने के लिए प्रयास किया गया है, तो फिर ये कीमतें क्यों न रूक पा रही है? दिन दूनी रात चौगनी गति से इस मूल्य वृद्धि के बढ़ने के आधार और कारण क्या है?

भारतवर्ष में वस्तुओं की बढ़ती हुई कीमतों के विषय में यह तथ्य स्पष्ट हो जाता है कि आजादी के बाद हमारे देश में कीमतों की बेशुमार वृद्धि हुई है। बार बार सत्ता परिवर्तन और दलों की विभिन्न सिद्धान्तवादी विचारधाराओं से अर्थव्यवस्था को कोई निश्चित दिशा नहीं मिली है। बार बार सत्ता परिवर्तन के कारण अर्थव्यवस्था पर बहुत असर पड़ा है। जो भी दल सत्ता में आया, उसने अपनी अपनी आर्थिक नीति को लागू किया। यों तो सभी सरकार ने मुद्रास्फीति पर काबू पाने का बरारबर प्रयास किया। फिर भी अपेक्षित सफलता किसी भी सरकार को नहीं मिली।

प्रथम पंचवर्षीय योजना में कृषि उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण थोक कीमतों में 18.4 प्रतिशत कमी हुई। लेकिन इस योजना के अन्त में कीमतों का बढ़ना पुनः जारी हो गया। दूसरी पंचवर्षीय योजना के दौरान कीमतों का बढ़ना रूका नहीं और इनकी वृद्धि 30 प्रतिशत हो गई। तीसरी पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत खाद्यान्न की अत्यधिक वृद्धि के कारण कीमतों की वृद्धि दर लगभग स्थिर थी। लेकिन सन् 1962 में चीनी आक्रमण और सन् 1965 में पाकिस्तानी आक्रमण के फलस्वरूप युद्ध खर्च के साथ साथ अन्य राज्यों में सूखा और बाढ़ की भयंकर स्थिति से खाद्यान्न में भारी कमी के कारण मूल्य दर बढ़ना शुरू हो गया।

 

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