मैं अपने तीन भाई बहनों में सबसे छोटा हूं। जब मैं छोटा था तो प्रतिदिन उन्हें विद्यालय जाते देखता था। मुझे लगता, वह दिन कब आयेगा जब मैं भी नयी नयी किताबें, नया बैग और सुन्दर सा लंच बाक्स लेकर पढ़ने जाऊंगा।

essay on vidyalaya mein pahla din in hindiमेरे मम्मी पापा ने कई विद्यालयों में फार्म भरे। एक दो विद्यालयों में मैं साक्षात्कार के लिये भी गया। एक जगह तो मैं रोने ही लगा, क्योंकि मैं मम्मी के बिना कभी अकेला इतने लोगों में नहीं गया था। अन्ततः मुझे बालभारती स्कूल में प्रवेश मिल गया। सबने हमें बधाई दी, क्योंकि यह एक अच्छा विद्यालय है।

इससे पूर्व मैं छोटे प्ले स्कूल गया था, पर बड़े स्कूल में जाने का दिन मेरे जीवन की एक महत्वपूर्ण शुरूआत थी।

मैंने इस दिन की प्रतीक्षा की थी। मुझे विद्यालय का प्रथम दिवस हमेशा याद रहेगा।

उस दिन सोमवार था, पहली मार्च! उस समय मेरी उम्र लगभग पांच वर्ष थी। माँ ने मुझे सुबह जल्दी उठाकर स्नान के बाद नयी स्कूल यूनीफार्म पहनने को दी। नये नये जूते जुराबें पहनाकर मुझे तैयार किया। मेरी पसंद का नाश्ता बनाकर नये लंच बाक्स में डाल कर दिया।

पिताजी मुझे विद्यालय छोड़ने गये। सभी बच्चे अपने माता पिता के साथ आये हुए थे। कक्षा अध्यापिका ने मुझे अपने पास बुलाया और पिताजी को जाने के लिए कह दिया। मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। चारों ओर अपरिचित लोगों का मेला लगा हुआ था। मेरा उत्साह लुप्त हो गया और मुझे डर लगने लगा।

अध्यापिका ने कक्षा में सभी बच्चों से मेरा परिचय कराया। मुझे खेलने के लिए खिलौने दिये। चाकलेट भी दी। मैं भी अब सामान्य हो गया और कुछ ही देर में मेरे बहुत से दोस्त बन गये। हमने एक साथ बैठ कर लंच किया। कुछ देर बाद मुझे घर की याद आने लगी। तभी छुट्टी की घंटी बजी और हम सब गेट की ओर भागे। गेट पर अपनी माँ को देख मैं उनकी गोद में चढ़ गया। मम्मी ने भी मुझे बहुत प्यार किया। विद्यालय का प्रथम दिन मुझे सदैव स्मरण रहेगा।

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