गणेश जी को ही दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?

Ganesh ji ko Durva kyon chadhai jati hai?

गणों के स्वामी होने के कारण उनका एक नाम गणपति भी है। ज्योतिष में इनको केतु का देवता माना जाता है और जो भी संसार के साधन हैं, उनके स्वामी श्री गणेश जी हैं। हाथी जैसा सिर होने के कारण उन्हें गजानन भी कहते हैं। गणेश जी का नाम हिन्दु शास्त्रों के अनुसार किसी भी कार्य के लिये पहले पूज्य है। गणेश ही ऐसे देव हैं, जिनको यह चढ़ाई जाती है। दूर्वा से गणेश जी प्रसन्न होते हैं। दूर्वा गणेश जी को बहुत प्रिय है।
इक्कीस दूर्वा को एकत्रित कर एक गांठ बनाई जाती है और कुल 21 गांठ गणेश जी को मस्तक पर चढ़ाई जाती है। इस बारे में एक कथा प्रचलित है ऋषि मुनि और देवता लोगों को एक राक्षस परेशान किया करता था। जिसका नाम था अनलासुर (अनल अर्थात् आग) देवताओं के अनुरोध पर गणेश जी ने उसे निगल लिया। इससे उनके पेट में तीव्र जलन हो गई, तब कष्यप मुनि ने दुर्वा की 21 गांठ बनाकर उन्हें खिलाई। जिससे यह जलन शांत हो गई। दूर्वा एक औषधि है। इस कथा द्वारा हमें यह संदेश प्राप्त होता है कि पेट की जलन और पेट के रोगों के लिए दुर्वा औषधि का कार्य करती है। मानसिक शांति के लिए यह बहुत लाभप्रद है। यह विभिन्न बीमारियों में एण्टीबायोटिक का काम करती है, उसको देखने और छूने से मानसिक शांति मिलती है और जलन शांत होती है। वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि कैंसर रोगियों के लिए भी यह लाभप्रद है।