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गर्भवती महिलाओं के लिए चेतावनी, रखे इस तरह अपना ध्यान

गर्भवती महिलाये अक्सर अधिक विचलित रहती है| जिसके कारन वो कई बार ऐसा कर जाती है, जो उनके आने वाले शिशु के लिए घातक हो सकता है| गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में संक्रमण काफी आम है| अधिकतर महिलाये इन संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं का सहारा लेती हैं| शायद यही सामान्य सोच हैं, कि कोई भी एंटीबायोटिक मेडिसिन लेलो| उन्हें पता नहीं है कि ऐसा करने से गर्भपात होने की संभावना बढ़ सकती है।

गर्भवती महिलाओ की नादानी बन सकती है बड़ा अभिशाप

चेतावनी एक नए अध्ययन के माध्यम से आई है, जो कहती है कि गर्भधारण के शुरुआती चरणों में संक्रमण करने के लिए महिलाओं को आम एंटीबायोटिक दवाएं लेने से गर्भपात होने का खतरा दो गुना बढ़ सकता है। कनाडा में यूनिवर्सिटी डी मॉन्ट्रियल के शोधकर्ताओं ने करीब 8,702 मामलों के आंकड़ों को देखा| जिनकी परिभाषा नैदानिक ​​रूप से मिली-जुली गर्भावस्था के रूप में हुई थी| जो 87,020 नियंत्रणों से मेल खाती थी। गर्भपात के समय की गर्भावस्था का मतलब 14 सप्ताह की गर्भावस्था से है। 11,018 (12.6 प्रतिशत) नियंत्रणों की तुलना में कुल 1,428 (16.4 प्रतिशत) मामलों में प्रारंभिक गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक दवाओं के संपर्क में थे। प्रतिभागी 15 और 45 वर्ष की आयु के बीच थे।

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गर्भवती महिलाओ की नादानी बन सकती है बड़ा अभिशाप

शोधकर्ताओं ने पाया कि आम एंटीबायोटिक्स के कई वर्ग जैसे कि माक्रोलिड्स, क्विनोलोन्स, टेट्रराइक्लिन, सल्फोमामाइड और मेट्रोनिडाजोल, प्रारंभिक गर्भावस्था में गर्भपात के एक बढ़ते जोखिम से जुड़े थे। उन्होंने यह भी पाया कि जिन महिलाओं की गर्भपात हुई| वे अकेले रहते थे और कई स्वास्थ्य समस्याएं और संक्रमण से पीड़ित थे।

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गर्भवती महिलाओं में मूत्र पथ के संक्रमण का इलाज करने के लिए अक्सर इरिथ्रोमाइसिन और नाइट्रोफुरैंटोइन का इस्तेमाल किया जाता है| जो अधिक जोखिम के साथ जुड़े नहीं है-शोधकर्ताओं ने कहा।

यूनिवर्सिटी डी मॉन्ट्रियल से एनीक बेरर्ड ने कहा-यद्यपि संक्रमण का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक का उपयोग अकाली जन्म के जोखिम में कमी और अन्य अध्ययनों में कम जन्म के वजन से जुड़ा हुआ है| हमारी जांच से पता चलता है कि कुछ प्रकार के एंटीबायोटिक दवाओं में सहज गर्भपात का खतरा बढ़ रहा है| जिसमें 60 प्रतिशत से दो गुना वृद्धि जोखिम है। यह अध्ययन कनाडा मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

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