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नई दिल्ली.कत्थक नृत्यांगना सितारा देवी का डूडल लगाकर गूगल ने उन्हें सम्मान दिया है. 8 नवंबर को सितारा देवी का 97वां जन्म दिन है. गूगल के डूडल से भारतीय संस्कृति का दुनिया में प्रचार हो रहा है और देश की नई पीढ़ी इस बहाने हमारी कला संस्कृति को समझ रही है.

सितारा देवी की कत्थक में अपनी विशिष्ट पहचान थी वे जब 16 बरस की थीं गुरु कवि रविंद्र नाटय टैगोर ने उनका डांस देखा तो खुश होकर उन्हें ‘कत्थक क्वीन’ के नाम से नवाज़ा था. सितारा देवी का काफी समय बॉलीवुड में भी बीता उन्होंने कई बड़ी हीरोइनों को कत्थक डांस सिखाया था.

इनमें रेखा, मधुबाला, माला सिन्‍हा और काजोल जैसी एक्‍ट्रेस के नाम शामिल हैं.कथक नृत्य में उनकी मयूर की गत, थाली की गत, जटायु मोक्ष, गत निकास की प्रस्तुति बेमिसाल थी.

वर्ष 1933 में बॉलीवुड के फिल्म निर्माता निरंजन शर्माने फिल्म ‘वसंत सेना’ में नृत्यांगना के तौर उन्हें पहली बार मौक़ा दिया था. इसके बाद फिल्मों में कोरियोग्राफी के जरिये भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. जब वे बनारस से मुंबई रवाना हुईं तो उनकी उम्र सिर्फ 13 साल थी.

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उन्होंने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान लगातार 11:30 घंटा तक नृत्य करने का रिकार्ड भी बनाया था.बनारस घराने से कथक की महारत हासिल कर उन्होंने इस नृत्य को विश्व पटल तक पहुंचाया.

कहते हैं कि उन्होंने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया. जब भी मान को ठेस लगी उसका बेबाक जवाब भी दिया। देर से पद्म अलंकरण देने से खफा होकर वर्ष 2003 उन्होंने पद्मविभूषण को ठुकरा दिया था.

सितारा देवी को कला और नृत्य के प्रति उनके विशेष योगदान के लिए ‘पद्मश्री’ (1970) और ‘कालिदास सम्मान’ (1994) से भी सम्मानित किया गया है.

उनका जन्‍म 8 नवंबर, 1920 को कोलकाता के नाथुन बाजार में हुआ था.पांच साल की उम्र में वह बनारस पैतृक आवास बनारस के कबीरचौरा आ गई थीं। जन्‍म के कुछ दिनों बाद उनके माता-पिता ने उन्‍हें नौकरानी को दे दिया था, क्‍योंकि उनका मुंह थोड़ा टेढ़ा था.

नौकरानी ने बचपन में सितारा देवी की खूब सेवा करके उनका मुंह ठीक कर वापस उनके माता-पिता को लौटा दिया. इनके घर में लोग इन्हें धनतेरस को पैदा होने की वजह से धन्नो कहकर बुलाते थे. उनके पिता सुखदेव महाराज भी कत्थक नर्तक थे.धनतेरस के दिन पैदा होने से माता-पिता ने नाम धनलक्ष्मी रखा और प्यार से उन्हें धन्नो कहते थे.

नृत्यांगना सितारा ने दो शादियां की थीं. पहली शादी उन्होंने फिल्म मुगले आजम के निर्देशक के. आसिफ से की लेकिन यह रिश्ता कम समय में ही टूट गया और उन्होंने तलाक ले लिया.दूसरी शादी उन्होंने ‘डॉन’ फिल्म के निर्माता कमल बरोट के भाई प्रताप बरोट से की थी. उनके पुत्र रंजीत बरोट हैं.

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