नूतन गृह प्रवेश कब कब नहीं करना चाहिए?

Nutan Griha pravesh kab nahin karna chahiye?

Griha pravesh kab nahin karna chahiyeउत्तर: मुहूर्त्तशास्त्र के अनुसार नूतन गृह प्रवेश का मुहूर्त्त तभी देखा जाता है जब अपने खरीदे हुए नये घर में प्रवेश कर रहे हों। भाड़े के मकान, पुराने को नया बना रहे हो तब नहीं। उस समय जीर्ण गृह प्रवेश का मुहूर्त्त देखा जाता है। गुरू, शुक्र तारा अस्त, चातुर्मास कर्क कुम्भ की संक्रांति, आषाढ़ मास, मल मास, चौमासे में कभी भी गृह प्रवेश न करें नहीं तो आपको लाभ की जगह हानि ही करेगा।

Kya Nutan Griha-pravesh chaturmas (shravan, Bhado, Asoj, Kartik) mein kar sakte hain?

क्या नूतन (नया) गृह-प्रवेश चतुर्मास (श्रावण, भादों, आसोज, कार्तिक) में कर सकते हैं?

उत्तर: शास्त्र सम्मत प्रमाण के आधार पर नये मकान नवीन गृह जहां पर आप उत्तरायण में हो तो गुरू शुक्र के उदयकाल, कलश चक्र शुद्धि आदि के शुभ अवसर पर ही कर सकते हैं। फिर चतुर्मास के अवसर पर नवीन गृह प्रवेश किया तो वह शुभ फल कैसे प्रदान करेगा? शास्त्रनुसार वर्जित है तथा उस समय देवता भी शयनकाल में चले जाते हैं। अतः इस समय किराये पर लिये गये मकान, जीर्ण गृह, पुनर्निमित मकान, कुछ माह के लिए अस्थायी रहना हो, उसी परिस्थिति में गृह प्रवेश कर सकते हैं।

Naye ghar mein pravesh kin kin paristhitiyon mein nahin kar sakte?

नूतन गृह प्रवेश फिर किन किन परिस्थितियों में नहीं कर सकते?

उत्तर: मुहूर्त्तशास्त्र के अनुसार दग्धा, अमा, रिक्ता शून्य तिथियाँ, शुक्रवार को द्वादशी पड़ती हो। जन्म राशि व लग्न से अष्टम लग्न, क्रान्ति सम्मदोष, भद्रा, लुप्ताब्द, मृतयु आदि दुष्ट रोग। चर लग्न नवांश धनु, कुम्भु, मीन संक्रांतियाँ, सूर्य जब दक्षिणायन मे हो, गुरू शुक्र अस्त हो, रविवार व मंगलवार, यात्रोदित योगिनी-दिशामूल काल राहु शुद्धि न हो।

इन परिस्थितियों में अगर गृह प्रवेश किया जाता है तो मुहूर्त्त चिन्तामणि पीयुषधारा में वशिष्ठ के शब्दों में स्पष्ट कहा गया हैः-

कर्तुर्नाषो गृहारम्भे, प्रवेषे पतिनाशनम्। पीयुषधारा

सभी सज्जन लोगों से निवेदन है कि मनगढंत भ्रम से दूर रहें तथा शास्त्र सम्मत समय में ही गृह प्रवेश करें, अन्यथा सुख की जगह अशान्ति, गृह क्लेश, दुख, नाना प्रकार की समस्याओं आदि का सामना करना पड़ सकता है।