चुनाव आयोग ने कहा जल्द होगी गुजरात चुनाव तारीखों की घोषणा

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दिल्ली .विधानसभा चुनाव में देरी को लेकर उठ रहे सवालो और आलोचनाओं के बीच चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा है.एक वेबसाइट को दिए गए इंटरव्यू में मुख्य चुनाव आयुक्त एके जोती ने बताया की चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है.चुनाव घोषणा मे देरी की वजह गुजरात में आई बाढ़ है और इसमें के लोग मारे गए हैं.

अगर इस वक़्त चुनाव की तारीख़ की घोषणा हो जाती तो राहत-बचाव कार्य प्रभावित होते. |तारीख़ घोषित होते ही आचार संहिता लागू हो जाती है.

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जोती के अनुसार 27 सितंबर को गुजरात के मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को चिट्ठी भी भेजी थी.सरकार बाढ़ के कारण राहत और बचाव कार्यों को लेकर चिंतित थी.हमने इसे लेकर बात भी की थी.

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इसके साथ ही गुजरात में दिवाली एक बड़ा त्योहार होता है. गुजराती दिवाली और गुजराती नव वर्ष वहां के लोगों के लिए बेहद ख़ास होता है.

ऐसे मे चुनाव की घोषणा करने का सही समय नहीं था. जोती के अनुसार नियमों के मुताबिक़ चुनाव की तारीख़ें मतदान के 21 दिन पहले तक घोषित हो जानी चाहिए.

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अपने वक्तव्य मे उन्होंने ,2012 में हुए चुनाव का ज़िक्र करते हुए बताया की 2012 में हुए चुनाव मे आयोग ने मतदान से 60 दिन पहले चुनाव की तारीख़ों का एलान कर दिया था.ऐसे में लंबे समय तक आचार संहिता लागू रही थी.”

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तारीख़ों की घोषणा में देरी होने से से नरेंद्र मोदी को फ़ायदा होगा ?इस सवाल के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपनी प्रतिक्रिया मे कहा की राहुल गांधी भी गुजरात में चुनावी दौरे कर रहे हैं.

चुनाव आयोग पर लगातार उठ रहे सवालो और आलोचनाओं के आरोपों के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, की ”क़रीब 26 हज़ार कर्मियों की तैनाती गुजरात विधानसभा चुनाव संपन्न कराने के लिए होगी. जिससे बाढ़ के लिए जारी राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकता था

इसलिए बाढ़ के लिए जारी राहत और बचाव कार्य प्रभावित ना करते हुए| मुख्य चुनाव आयुक्त जल्द ही चुनाव की तारीखों की घोषणा करने वाले हैं.हिमाचल प्रदेश और गुजरात के विधानसभा चुनाव की तारीखों के घोषणा एक ही दिन, एक ही तारीखों की हो संभव नहीं हैं

मीडिया मे छपी रिपोर्ट के आधार पर कहा गया की मुख्य चुनाव आयुक्त ने गुजरात सरकार से पक्ष लिया हैं ? मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस सवाल को सिरे से नकार दिया और कहा कि यह सच नहीं है.उन्होंने अपने वक्तव्य, मे कहा की ”सरकार ने मुझे वो आवास तब दिया था जब मैं वहां मुख्य सचिव था.

जब मेरा ट्रांसफर हुआ तो रहने के लिए मेरे पास कोई ठिकाना नहीं था. ऐसे में मैंने उसी आवास में रहने देने के लिए अनुरोध किया था. इसमें कोई पक्ष लेने वाली बात नहीं है.”

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