खबरदार! वायु प्रदूषण आपको स्ट्रोक, दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ाता है

आजकल प्रदूषण के बढ़ते स्तर से स्ट्रोक (दिल का दौरा) पड़ने की सम्भावना बढ़ गयी है| इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रदूषण न केवल भारत में है| बल्कि दुनिया भर में प्रदूषण उच्च स्टार पर हो रहा है| प्रदूषण वाली हवाओ में हम दिन प्रतिदिन सांस ले रहे है, जो हमे धीरे-धीरे बीमारियों की और बढ़ा रही है|

रोज हवा में घुल रहा है विषाक्त प्रदूषण

हर नए दिन में हवा में एक विषाक्तता बढ़ जाती है| जो धीरे-धीरे वैश्विक आबादी पर खतरे के रडार को बढ़ा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के ने कई चेतावनियाँ जारी की है| वही स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को रोकने के लिए कई सुझाव और युक्तियां दी हैं| वायु प्रदूषण लोगों के स्वस्थ जीवन जीने में बाधा बना हुआ है। श्वसन संबंधी समस्याएं, आंखों के संक्रमण, त्वचा और बाल समस्याएं, ये समस्याएं अंतहीन हैं| चिकित्सकों ने प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी मामलों में स्थिर वृद्धि का उल्लेख किया है।

वायु प्रदूषण आपको स्ट्रोक, दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ाता है

स्ट्रोक (दिल का दौरा) का प्रमुख कारण है वायु प्रदूषण

एक अध्ययन ने कहा है कि वायु प्रदूषण भी दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। अध्ययन के अनुसार प्रदूषित हवा में छोटे कण फेफड़ों से हमारे खून में जा सकते हैं और दिल के दौरे या स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। वायु प्रदूषण में नैनोकणों को कार्डियोवैस्कुलर बीमारी के साथ जोड़ा गया है| जिससे समय से पहले मौत हो सकती है। यूके में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ और नीदरलैंड में पर्यावरण सहित उन वैज्ञानिकों ने पाया है कि साँस नैनोकणों के द्वारा फेफड़े से खून की यात्रा करती हैं| जो संभावित रूप से वायु प्रदूषण और हृदय रोग के बीच के संबंध को समझाते हैं।

स्ट्रोक (दिल का दौरा) साबित करने के लिए किया गया अध्ययन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का अनुमान है कि 2012 में बाह्य वायु प्रदूषण से संबंधित मौतों की लगभग 72 प्रतिशत मौत की वजह हृदय रोग और स्ट्रोक है। पल्मोनरी रोग, श्वसन संक्रमण और फेफड़ों के कैंसर अन्य 28 प्रतिशत से जुड़े थे। कई वैज्ञानिकों ने संदेह किया है कि ठीक कण फेफड़ों से खून में जाते है लेकिन इंसानों में इस धारणा को समर्थन देने वाले साक्ष्य एकत्र करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा हैं। एक अध्ययन नैनोकणों को चेक करने के लिए किया गया| अध्ययन में 14 स्वस्थ व्यक्तियों, 12 सर्जिकल रोगियों और कई माउस मॉडल ने सोने के नैनोकणों को एकत्रित किया| जो मेडिकल इमेजिंग और दवा वितरण में सुरक्षित रूप से उपयोग किए गए हैं। अध्ययन के तुरंत बाद रक्त और मूत्र में नैनोकणों का पता चला। महत्त्वपूर्ण रूप से नैनोकणों को सूजन वाले संवहनी स्थलों में अधिमान्य रूप से जमा हुआ पाया| जिनमें स्ट्रोक के जोखिम वाले रोगियों में धमनी सजीले टुकड़े शामिल थे।

निष्कर्ष बताते हैं कि नैनोकणों फेफड़ों से रक्तप्रवाह से यात्रा कर सकते हैं और कार्डियोवास्कुलर सिस्टम के अतिसंवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं| जहां वे संभवतः दिल का दौरा या स्ट्रोक की संभावना बढ़ा सकते हैं, शोधकर्ताओं के अनुसार।यह अध्ययन पत्रिका एसीएस नैनो में प्रकाशित किया गया था।