Hindi Essay on Mele Pradarshani ka ankhon dekha varnan मेले या प्रदर्शनी का आँखों देखा वर्णन पर लघु निबंध

Mele (Pradarshani) ka Ankhon Dekha Varnan par laghu nibandh

प्रस्तावना- दिल्ली भारत की राजधानी है। यहाँ प्रतिदिन कोई न कोई मेला या प्रदर्शनी आयोजित होती रहती है। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब वहाँ कोई प्रदर्शनी या मेला न हो। ये मेले या प्रदर्शनियाँ वैज्ञानिक और औद्योगिक प्रगति को दर्शाने के लिए लगाई जाती हैं। प्रत्येक मेले और प्रदर्शनी को देख पाना संभव नहीं होता। पिछले वर्ष मुझे दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित व्यापार मेले को देखने का अवसर मिला था। यह मेला बहुत ही आकर्षक और महत्वपूर्ण था।Short Essay on Kisi Aankhone Dekhe Mele ya Pardarshni ka Varnan

अन्तर्राष्ट्रीय मेला- यह व्यापार मेला अन्तर्राष्ट्रीय था। इस व्यापार मेले में रूस, चीन, जापान, पाकिस्तान, जर्मनी, फ्रांस और इंग्लैण्ड आदि कई देशों ने भाग लिया था। रूस, चीन, जापान और पाकिस्तान के मंडप बहुत आकर्षक थे। इन मंडपों को देखने के लिए लाखों लोग पंक्ति बना कर आ जा रहे थे। इन मंडपो में उन्होंने अपने अपने देश की चुनी हुई वस्तुएँ  प्रदर्शन कर रखी थीं।

प्रत्येक मंडप उस देश की अपनी संस्कृति और कला का नमूना था।

प्रातः काल का भ्रमण

प्रस्तावना- संसार में सभी व्यक्ति रहना चाहते हें। स्वास्थ्य के बिना जीवन का आनंद समाप्त हो जाता है। इतना ही नहीं, अस्वस्थ व्यक्ति का जीना भी दूभर हो जाता है। स्वास्थ्य का जीवन में बहत महत्व है। स्वस्थ रहने के लिए अनेक प्रकार के शारीरिक और मानसिक व्यायाम उपयोगी होते हैं। व्यायाम भी कई प्रकार के हैं। कई व्यायाम ऐसे हैं जिनके लिए कुछ साधनों को जुटाना पड़ता है। उन साधनों को जुटाने के लिए धन की आवश्यकता होती है। निर्धन व्यक्ति तो ऐसे साधनों का उपयोग बिल्कुल नहीं कर सकता। प्रातः भ्रमण भी व्यायाम का एक साधन है। यह एक ऐसा साधन है जिसके लिए कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता। इससे शरीर का तो व्यायाम हो ही जाता है, मन भी प्रसन्न रहता है। इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रातः काल का भ्रमण बहुत आवश्यक और उपयोगी है।

भ्रमण के लिए ब्रहा मुहूर्त- सूर्य उदय होने से पहले के समय को ब्रहम मुहूर्त कहते हैं। यह समय भ्रमण के लिए बहुत उपयोगी है। इस समय उठने का आनंछ ही निराला है। ब्रहम मुहूर्त में उठकर मुनष्य को सबसे पहले खूब पानी पीना चाहिए। इसके बाद शौचादि करके अपना मुँह हाथ साफ पानी से धोना चाहिए और प्रातः घूमने के लिए चल पड़ना चाहिए। प्रातः काल के भ्रमण के लिए खुला और प्रदूषण रहित स्थान अच्छा रहता है। बगीचे और पार्क में भ्रमण करना अधिक लाभदायक होता है।

भ्रमण से आनंद- भ्रमण से मनुष्य को बहुत आनंद मिलता है। इससे मन प्रसन्न रहता है और आत्मा को शांति प्राप्त होती है। अन्तः करण निर्मल हो जाता है और शरीर में स्फूर्ति आती है। यह एक ऐसा व्यायाम है। जिस शरीर के प्रत्येक अंग को बल मिलता है। चेहरा खिल उठता है, माँसपेशियाँ सुदृढ़ और पुष्ट होती हैं। शरीर में रक्त का संचार होता है और रक्त भी साफ होता है।

प्रातः भ्रमण स्वस्थ और रोगी दोनों के लिए लाभदायक- प्रातः काल का भ्रमण स्वस्थ व्यक्तियों के लिए बहुत लाभदायक है। रोगी व्यक्तियों के लिए भी यह बहुत उपयोगी है। प्रातः काल का भ्रमण तो ऐसी औषधि है जो शरीर में शक्ति का संचार कर देती है। यह रोगियों के लिए रामबाण है। इससे रोगी का रोग दूर हो जाता है। डाक्टर और वैद्य भी इसीलिए प्रातः भ्रमण की सलाह देते हें।

प्रातः भ्रमण विद्यार्थियों के लिए उपयोगी- प्रातः काल का भ्रमण विद्यार्थियों के लिए भी विशेष उपयोगी है। इससे मस्तिष्क हल्का और ताजा रहता है और पढ़ाई में भी मन लगता है। इससे मन की थकान भी दूर होती है। स्मरण शक्ति बढ़ती है। जो कुछ भी पढ़ते हैं, वह समझ में आता है और याद रहता है।

उपसंहार- भ्रमण करते समय मुँह बंद रखना चाहिए और नाक से लम्बे लम्बे सांस लेने चाहिए। यदि आप चाहते हैं कि जीवन में औषधि की आवश्यकता न पड़े और शरीर तथा मन स्वस्थ रहे तो प्रातः भ्रमण नियमपूर्वक करना चाहिए। यह सौ दवाओं की एक दवा है। यही संजीवनी शक्ति है और लम्बी आयु तक नीरोग जीने का रहस्य है।