हिंदुस्तान के हिस्से में तो महज़ गुलामी है आई

Advertisement

हिंदुस्तान के हिस्से में तो महज़ गुलामी है आई

हिंदुस्तान के हिस्से में तो महज़ गुलामी है आई,
अपने हों गद्दार तो कैसे चमकेगी किस्मत भाई.

हिंदुस्तान के हिस्से में तो महज़ गुलामी है आई

गोरी आये गजनी आये लूट गए सारा सोना,
सोमनाथ को देख के लुटता सबकी आँखें भर आयीं.

Advertisement

डचों शकों ने और हूणों ने पहले तो हमको रौंदा,
अंग्रेजों ने सदियों हमसे अपनी गुलामी करवाई.

Advertisement

आज़ादी के दीवानों ने हिम्मत मगर नहीं हारी,
अपनी जान गंवाई लेकिन आज़ादी तो दिलवाई,

Advertisement
youtube shorts kya hai

आज़ादी के जश्न में डूबे और नहीं कुछ भी सोचा,
गौर से देखा तो धोखा है मन में गुलामी है छाई.

इंग्लिश रानी बनी घूमती संसद में न्यायालय में,
हिंदी-पट्टी में ही हिंदी झेल रही कितनी रुसवाई.

Advertisement

कोई दल हो कोई गुट हो राज न कोई कर पाया,
कांग्रेस भी तभी चली जब पड़ी विदेशी परछाई.

जन्मा वारिस लन्दन का और शोर शराबा यहाँ हुआ,
टी.वी.पर चौबीसों घंटे बजी यहाँ पर शहनाई.

अमरीका से विनती करते अपने ये देशी नेता,
इसे न वीजा मिलने पाए गुजराती है दंगाई.

देशी चरखे को कबाड़ में फेंक दिया तरुणाई .
आयें और विदेशी लूटें लागू है ऍफ़.डी.आई.

सत्य अहिंसा और स्वदेशी बापू के ही साथ गए,
छोड़ दिया इन सबको सबने जैसे ही सत्ता पायी.

पहले थी अंग्रेज कंपनी अब अमरीकी आयेंगी,
हाय गुलामी फिर झेलेंगे कैसी है किस्मत पायी.

~ शरत चन्द्र श्रीवास्तव

Advertisement