इतिहास क्या है ? गड़े मुर्दे उखाड़ना ! – राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी

इतिहास क्या है ? गड़े मुर्दे उखाड़ना ।
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मैं भी इंटरमीडियेट में इतिहास का विद्यार्थी था ।

जब मैंने इतिहास विषय लिया ,

तब मेरे दूसरे-दूसरे विषयों का विकल्प चुनने वाले सहपाठी

मुझसे कहते थे कि >> इतिहास क्या है ? गड़े मुर्दे उखाड़ना ।

आज सोचता हूं कि वे कितना सच कहते थे !

मैं देख रहा हूं कि विद्वान लोग इतिहास के सत्य को

लोक की आस्था से बड़ा सत्य समझ रहे हैं !

लोकजीवन के क्रमविकास को जानना अत्यन्त आवश्यक है
और इसके लिये हमें इतिहास का महत्त्व जानना होगा किन्तु

इतिहास का सच तो किताबों में है ,
गड़े मुर्दे उखाड़ना जैसा ,

उसमें भी इतने मत-मतान्तर हैं कि पूरा मायाजाल है ,
जिसमें से कोई निर्विवाद सच लेकर निकल पाना लगभग असंभव सा ही है ।

और लोक-आस्था का सत्य
लोकजीवन में जीवित है!

सिक्यूलर तो मैं भी हूं क्योंकि
लोकवार्ता सिक्यूलर है ।

किन्तु ऐसे सिक्यूलर का क्या करूं
जो सामान्यजन,समष्टिजन ,
सर्वजन और जीवन की अविच्छिन्न-परंपरा की अनदेखी करता हो ?

राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी

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