जहाज़ जो आपको सीधे ब्रितानी राज के दिनों की याद दिला देगा…

पहली बार देखने पर आप भी ठहर कर सिर्फ़ निहारते भर रहेंगे, इस विशालकाय पैडल स्टीमर को जिसका नाम पीएस ऑस्ट्रिच है.बांग्लादेश में इस स्टीमर को रॉकेट के नाम से जाना जाता है और ये प्रोपेलर पंखों के बजाय पैडल से चलता है.22 लोगों का स्टाफ़ हैं इस स्टीमर मे.बांग्लादेश के बनने के बाद ये ढाका और खुलना के बीच चलता है और एक तरफ़ के सफ़र में पूरे 16 घंटे लगते हैं.आसानी से 900 लोगों को सवारी कराने वाले इस स्टीमर के चलते हज़ारों लोग देश के अलग अलग हिस्सों तक सफर कर पाते हैं.

ये जहाज़ आपको सीधे ब्रितानी राज के दिनों की याद दिला देगा जब ये कोलकाता से चलकर ढाका होते हुए बंगाल की खाड़ी तक का सफ़र करता था.

इतने वर्षों बाद पीएस ऑस्ट्रिच आज भी बांग्लादेश की शान है और 1920 के दशक में बने ख़ास किस्म के ऐसे सिर्फ़ चार ही स्टीमर बचे हैं.

ये दुनिया भर में विख्यात है और आज भी दुनिया भर से सैलानी इस पर सफ़र करने आते हैं.1990 के दशक में इसमें ऑस्ट्रिया से लाए गए एक डीज़ल इंजन को फ़िट किया गया और अब ये कोयले से नहीं चलता.

इस रॉकेट स्टीमर ने दूसरा विश्व युद्ध, 1947 का बंटवारा और 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई तक का दौर देखा है.

लेकिन शायद इस ऐतिहासिक बोट के लिए भी चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं.महंगाई के दौर में इन्हें दुरुस्त रखना , चलती हालत में बनाए रखना मुश्किल हैं.

इसे एक महीने  चलाने की लागत ही 15 लाख रुपए तक खिंच जाती है और आमदनी इससे कहीं कम हो रही है.काफ़ी लोग इन दिनों ज़्यादा तेज़ चलने वाले और सस्ते स्टीमर पसंद कर रहे हैं.

जिससे पीएस ऑस्ट्रिच के पुराने मुसाफ़िरों में डर बढ़ रहा है.स्थाई लोगो के मुताबिक  ये सर्विस बंद हो गई तो हमारे विकल्प बहुत कम हो जाएंगे. सस्ता और सहज होने के अलावा ये हमेशा समय पर चलता है.

आज तक इस स्टीमर को लेकर कोई दिक्कत नहीं आई लेकिन इसके भविष्य को लेकर सभी  चिंतित हैं.पीएस ऑस्ट्रिच  की उम्र बढ़ने के साथ-साथ  मरम्मत का काम  भी बढ़ रहा है. अक्सर, हफ़्ते-महीने लग जाते हैं इसे ठीक करने में.

सरकार इसको चलाने का ख़र्च तो उठा रही है लेकिन बहुत कोशिशों के बाद.पीएस ऑस्ट्रिच इतिहास की धरोहर हैं लेकिन माथे पर परेशानी भी साफ़ दिखती है.

इस स्टीमर के  इंजन और पैडल के पुर्ज़े मुश्किल से मिलते हैं और विदेश से मंगाने पड़ते हैं और इस वजह से भी इसको चलती हालत में बनाए रखने काफी मुश्किल काम हैं.

ये नायाब किस्म के  पैडल स्टीमर दुनिया भर में बहुत कम ही बचे हैं. बीते दिनों की याद दिलाने वाले ये जहाज़ तेज़ी के लिए नहीं बल्कि आराम के लिए बने थे. जिन्हें आज भी उसकी तलाश है, वे पीएस ऑस्ट्रिच तक पहुंच ही जाते हैं.