सिर्फ 3 सालों में देश ने खोये 578 जवान, अकेले कश्मीर में 203 जवान हुए शहीद

अच्छे दिनों का वादा कर सत्ता में आयी भाजपा की सरकार आतंकवाद और नक्सलवाद के मुद्दे पर पिछड़ती नजर आ रही है. आंकड़ों को देखें तो देश ने पिछले 3 सालों में 578 जवानों को खो दिया है. सिर्फ कश्मीर में यह आँकड़ा 200 से अधिक है.

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इतना ही नहीं, पिछले 3 सालों में आतंकी हमले में 877 भारतीय नागरिक मारे गए हैं जिसके बाद भी सरकार ने जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कोई ठोस कदम नहीं उठाये हैं.

इन सभी मुद्दों पर हमला करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने आज कहा कि पाकिस्तान ने सिर्फ तीन सालों में 1363 बार जम्मू कश्मीर के रास्ते घुसपैठ करने की कोशिश की. इतना ही नहीं हमारे 3 जवानों का शव क्षत विछत कर दिया परन्तु सरकार सिर्फ निंदा करने में व्यस्त है.

आजाद ने कहा कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में जब दो जवानों के शव क्षत-विक्षत किए गए थे तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के अपने चुनावी भाषणों में पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देने की बात कही थी लेकिन अब पाकिस्तान जा कर बिरयानी खाना और शाल, सदियों का आदान प्रदान ही दिख रहा है.

उन्होंने नक्सल समस्या को भी उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार नक्सलियों से निपटने में भी बुरी तरह फेल रही है. पिछले तीन साल में 271 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं, नक्सलियों ने 665 नागरिकों की हत्या की है और नक्सली हिंसा की 3517 घटनायें हुई हैं।

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नक्सली हमले में शहीद हुए जवान

 

कांग्रेस VS भाजपा- क्या कहते हैं आंकड़े

पूरे देश भर हुई आतंकी घटनाओं पर गौर करें तो कांग्रेस के शासन काल में 2012 में जहां पूरे साल में 139 जवान शहीद हुए वहीँ 2016 कुल शहीदों की संख्या 180 पहुँच गयी.

इनमे सबसे ज्यादा प्रभावित जम्मू कश्मीर रहा पर वहाँ भी आंकड़े अलग ही कहानी कहते हैं. जम्मू & कश्मीर 2013 में जहाँ 170 घटनाओं में सेना के 53 जवान मारे गए थे वहीँ 2016 आते आते घटनाओं की संखया में लगभग दोगुने का इजाफा हुआ है. कुल 308 घटनाओं में सेना के 82 जवान शहीद हुए.

इतना ही नहीं बल्कि घुसपैठ की घटनाओं की यदि तुलना करें तो 2013 में हुए 277 घटनाओं के मुकाबले 2016 में 364 घटनाएं हुई हैं.

2013 में कुल 97 घुसपैठ की कोशिशें सफल रही थी जबकि भाजपा के शासन काल में यह आंकड़ा बढ़ कर 112 हो गया.