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2 करोड़ नौकरियों को पैदा करने का वादा भले ही पूरा न हुआ हो परन्तु नोटबंदी की वजह से आयी सुस्ती ने प्राइवेट सेक्टर में आर्थिक समस्या कड़ी कर दी है जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर नौकरियों के जाने की सम्भावना बनी हुई है.

job crisis survey

हालाँकि आईटी मिनिस्टर रविशंकर शर्मा ने इस मुद्दे पर बयान दे कर कहा था कि मीडिया इस मुद्दे को बढ़ा चढ़ा कर रिपोर्ट कर रहा है क्यूंकि ऐसी रूटीन छटनियाँ परफॉरमेंस के आधार पर होती रहती हैं.

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लेकिन इकोनॉमिक्स टाइम्स की सर्वे की रिपोर्ट अलग ही खुलासा करती है. सर्वे में नौकरीपेशा लोगों ने उनके जॉब के बारे में पुछा गया और उनसे उनके विचार पूछे गए जिससे यह सामने आया की जॉब सेक्टर में संकट गंभीर है और हर एम्प्लॉई कमोबेश अपनी नौकरी को ले कर डरा हुआ है.

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करीब 11000 प्रोफेशनल्स इस सर्वे में शामिल हुए जिसमे से 50 प्रतिशत का यह मानना है कि आने वाले दिन सुखद नहीं हैं और प्राइवेट सेक्टर में और भी छटनियाँ होने वाली हैं . 62 प्रतिशत लोगों का कहना था कि उन्हें इस बात का भरोसा नहीं कि वो अपनी जॉब बचा पाएंगे.

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कितने तैयार हैं आप?

सर्वे में शामिल लोगों से जब यह पूछा गया कि आप अपनी कंपनी में नई तकनीक के प्रति क्या रुख अपनाएंगे, तो 81 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह नई टेक्नॉलजी को संचालित करना सीखेंगे। लेकिन, 9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह कंपनी बदल लेंगे जबकि 11 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह उसी कंपनी में कोई दूसरा काम कर लेंगे।

क्या कहती है लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट

भारत के लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था जहां 7 प्रतिशत की रफ़्तार से आगे बढ़ रही है वहीँ रोजगार की वृद्धि दर सिर्फ 1.1 प्रतिशत है, सबसे चिंताजनक बात यह है कि देश में बेरोजगारी दर 35% के स्तर को छु रही है.

berojgari in india

हालाँकि यह बात नोट करने लायक है कि भारत ने 2015 में 8 श्रम प्रधान क्षेत्रों में सिर्फ 135000 नौकरियां पैदा की. पर हैरान कर देने वाली बात यह है कि इसी अवधि में स्किल्ड श्रमिकों की संख्या में 1 करोड़ का इजाफा हुआ है जिन्हें जॉब की आवशयकता है.

तो क्या आटोमेशन है जिम्मेदार 

रिसर्च के अनुसार 2021 तक हर 10 में से 4 नौकरी औटोमेशन की वजह से चली जाएगी. पूरी दुनिया में और खास कर विकसित देशों में इससे जॉब क्राइसिस बढ़ी है.

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परन्तु ऐसा नहीं कि भारत सरकार को इसका पता नहीं था. वर्ल्ड बैंक के प्रेजिडेंट जिम किम में अक्टूबर 2016 में यह करते हुए चेताया था अगर भारत सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो 69 प्रतिशत नौकरियों पर ऑटोमेशन की वजह से गंभीर खतरा होगा. उन्होंने कहा था कि सरकार ने अगर एक मजबूत स्ट्रेटेजी के साथ ब्लू कॉलर और वाइट कॉलर वाले श्रमिकों के लिए कोई समाधान नहीं ढूँढा तो मामला हाथ से निकल सकता है.

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