कैफी आज़मी Shayari in Hindi अंदेशे (होके मजबूर मुझे उस ने भुलाया होगा )

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Kaifi Azmi shayari – Andeshe (hoke majaboor mujhe us ne bhulaaya hogaa)

रूह बेचैन है इक दिल की अज़ीयत क्या है
दिल ही शोला है तो ये सोज़-ए-मोहब्बत क्या है
वो मुझे भूल गई इसकी शिकायत क्या है
रंज तो ये है के रो-रो के भुलाया होगा

वो कहाँ और कहाँ काहिफ़-ए-ग़म सोज़िश-ए-जाँ
उस की रंगीन नज़र और नुक़ूश-ए-हिरमा
उस का एहसास-ए-लतीफ़ और शिकस्त-ए-अरमा
तानाज़न एक ज़माना नज़र आया होगा

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झुक गई होगी जवाँ-साल उमंगों की जबीं
मिट गई होगी ललक डूब गया होगा यक़ीं
छा गया होगा धुआँ घूम गई होगी ज़मीं
अपने पहले ही घरोंदे को जो ढाया होगा

दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाये होंगे
अश्क आँखों ने पिये और न बहाये होंगे
बन्द कमरे में जो ख़त मेरे जलाये होंगे
इक-इक हर्फ़ जबीं पर उभर आया होगा

उस ने घबरा के नज़र लाख बचाई होगी
मिट के इक नक़्श ने सौ शक़्ल दिखाई होगी
मेज़ से जब मेरी तस्वीर हटाई होगी
हर तरफ़ मुझ को तड़पता हुआ पाया होगा

बेमहल छेड़ पे जज़्बात उबल आये होंगे
ग़म पशेमा तबस्सुम में ढल आये होंगे
नाम पर मेरे जब आँसू निकल आये होंगे
सर न काँधे से सहेली के उठाया होगा

ज़ुल्फ़ ज़िद कर के किसी ने जो बनाई होगी
रूठे जलवों पे ख़िज़ाँ और भी छाई होगी
बर्क़ आँखों ने कई दिन न गिराई होगी
रंग चेहरे पे कई रोज़ न आया होगा

होके मजबूर मुझे उस ने भुलाया होगा
ज़हर चुप कर के दवा जान के ख़ाया होगा

कैफी आज़मी के ये बेहतरीन 25 शेर आपके दिल को गहराइयों तक छू लेंगे

Kaifi Azmi Poetry – Andeshe (hoke majaboor mujhe us ne bhulaaya hogaa)

rooh bechain hai ik dil ki ajiyat kya hai
dil hi shola hai to ye soj-e-mohabbat kya hai
vo mujhe bhool gai isaki shikaayat kya hai
ranj to ye hai ke ro-ro ke bhulaaya hogaa

vo kahaan aur kahaan kaahif-e-gm sojish-e-jaan
us ki rangin najr aur nukoosh-e-hiramaa
us ka ehasaas-e-latif aur shikast-e-aramaa
taanaajn ek jmaana najr aaya hogaa

jhuk gai hogi javaan-saal umangon ki jabin
mit gai hogi lalak doob gaya hoga yakin
chha gaya hoga dhuaan ghoom gai hogi jmin
apane pahale hi gharonde ko jo dhaaya hogaa

dil ne aise bhi kuchh afsaane sunaaye honge
ashk aankhon ne piye aur n bahaaye honge
band kamare men jo kht mere jalaaye honge
ik-ik harf jabin par ubhar aaya hogaa

us ne ghabara ke najr laakh bachaai hogi
mit ke ik naksh ne sau shakl dikhaai hogi
mej se jab meri tasvir hataai hogi
har taraf mujh ko tadpata hua paaya hogaa

bemahal chhed pe jajbaat ubal aaye honge
gm pashema tabassum men dhal aaye honge
naam par mere jab aansoo nikal aaye honge
sar n kaandhe se saheli ke uthaaya hogaa

julf jid kar ke kisi ne jo banaai hogi
roothe jalavon pe khijaan aur bhi chhaai hogi
bark aankhon ne kai din n giraai hogi
rang chehare pe kai roj n aaya hogaa

hoke majaboor mujhe us ne bhulaaya hogaa
jhar chup kar ke dava jaan ke khaaya hogaa

Kaifi Azmi – Andeshe (in Urdu)(hoke majaboor mujhe us ne bhulaaya hogaa)

رُوہَ بیچَینَ ہَے اِکَ دِلَ کِی اَزِییَتَ کْیا ہَے
دِلَ ہِی شولا ہَے تو یے سوزَ-اے-موہَبَّتَ کْیا ہَے
وو مُجھے بھُولَ گاِی اِسَکِی شِکایَتَ کْیا ہَے
رَںجَ تو یے ہَے کے رو-رو کے بھُلایا ہوگا

وو کَہاں اَورَ کَہاں کاہِفَ-اے-غَمَ سوزِشَ-اے-جاں
اُسَ کِی رَںگِینَ نَزَرَ اَورَ نُقُوشَ-اے-ہِرَما
اُسَ کا ایہَساسَ-اے-لَتِیفَ اَورَ شِکَسْتَ-اے-اَرَما
تانازَنَ ایکَ زَمانا نَزَرَ آیا ہوگا

جھُکَ گاِی ہوگِی جَواں-سالَ اُمَںگوں کِی جَبِیں
مِٹَ گاِی ہوگِی لَلَکَ ڈُوبَ گَیا ہوگا یَقِیں
چھا گَیا ہوگا دھُءآں گھُومَ گاِی ہوگِی زَمِیں
اَپَنے پَہَلے ہِی گھَروںدے کو جو ڈھایا ہوگا

دِلَ نے اَیسے بھِی کُچھَ اَفَسانے سُنایے ہوںگے
اَشْکَ آںکھوں نے پِیے اَورَ نَ بَہایے ہوںگے
بَنْدَ کَمَرے میں جو خَتَ میرے جَلایے ہوںگے
اِکَ-اِکَ ہَرْفَ جَبِیں پَرَ اُبھَرَ آیا ہوگا

اُسَ نے گھَبَرا کے نَزَرَ لاکھَ بَچائی ہوگِی
مِٹَ کے اِکَ نَقْشَ نے سَو شَقْلَ دِکھائی ہوگِی
میزَ سے جَبَ میرِی تَسْوِیرَ ہَٹائی ہوگِی
ہَرَ تَرَفَ مُجھَ کو تَڑَپَتا ہُءآ پایا ہوگا

بیمَہَلَ چھیڑَ پے جَزْباتَ اُبَلَ آیے ہوںگے
غَمَ پَشیما تَبَسُّمَ میں ڈھَلَ آیے ہوںگے
نامَ پَرَ میرے جَبَ آںسُو نِکَلَ آیے ہوںگے
سَرَ نَ کاںدھے سے سَہیلِی کے اُٹھایا ہوگا

زُلْفَ زِدَ کَرَ کے کِسِی نے جو بَنائی ہوگِی
رُوٹھے جَلَووں پے خِزاں اَورَ بھِی چھائی ہوگِی
بَرْقَ آںکھوں نے کاِی دِنَ نَ گِرائی ہوگِی
رَںگَ چیہَرے پے کاِی روزَ نَ آیا ہوگا

ہوکے مَجَبُورَ مُجھے اُسَ نے بھُلایا ہوگا
زَہَرَ چُپَ کَرَ کے دَوا جانَ کے خایا ہوگا

Kaifi Azmi – Andeshe (in Punjabi)(hoke majaboor mujhe us ne bhulaaya hogaa)

ਰੂਹ ਬੇਚੈਨ ਹੈ ਇਕ ਦਿਲ ਕੀ ਅਜੀਯਤ ਕ੍ਯਾ ਹੈ
ਦਿਲ ਹੀ ਸ਼ੋਲਾ ਹੈ ਤੋ ਯੇ ਸੋਜ-ਏ-ਮੋਹਬ੍ਬਤ ਕ੍ਯਾ ਹੈ
ਵੋ ਮੁਝੇ ਭੂਲ ਗਈ ਇਸਕੀ ਸ਼ਿਕਾਯਤ ਕ੍ਯਾ ਹੈ
ਰੰਜ ਤੋ ਯੇ ਹੈ ਕੇ ਰੋ-ਰੋ ਕੇ ਭੁਲਾਯਾ ਹੋਗਾ

ਵੋ ਕਹਾ ਔਰ ਕਹਾ ਕਾਹਿਫ-ਏ-ਗਮ ਸੋਜਿਸ਼-ਏ-ਜਾ
ਉਸ ਕੀ ਰੰਗੀਨ ਨਜਰ ਔਰ ਨੁਕੂਸ਼-ਏ-ਹਿਰਮਾ
ਉਸ ਕਾ ਏਹਸਾਸ-ਏ-ਲਤੀਫ ਔਰ ਸ਼ਿਕਸ੍ਤ-ਏ-ਅਰਮਾ
ਤਾਨਾਜਨ ਏਕ ਜਮਾਨਾ ਨਜਰ ਆਯਾ ਹੋਗਾ

ਝੁਕ ਗਈ ਹੋਗੀ ਜਵਾ-ਸਾਲ ਉਮੰਗੋੰ ਕੀ ਜਬੀੰ
ਮਿਟ ਗਈ ਹੋਗੀ ਲਲਕ ਡੂਬ ਗਯਾ ਹੋਗਾ ਯਕੀੰ
ਛਾ ਗਯਾ ਹੋਗਾ ਧੁਆ ਘੂਮ ਗਈ ਹੋਗੀ ਜਮੀੰ
ਅਪਨੇ ਪਹਲੇ ਹੀ ਘਰੋੰਦੇ ਕੋ ਜੋ ਢਾਯਾ ਹੋਗਾ

ਦਿਲ ਨੇ ਐਸੇ ਭੀ ਕੁਛ ਅਫਸਾਨੇ ਸੁਨਾਯੇ ਹੋੰਗੇ
ਅਸ਼੍ਕ ਆਖੋੰ ਨੇ ਪਿਯੇ ਔਰ ਨ ਬਹਾਯੇ ਹੋੰਗੇ
ਬਨ੍ਦ ਕਮਰੇ ਮੇੰ ਜੋ ਖਤ ਮੇਰੇ ਜਲਾਯੇ ਹੋੰਗੇ
ਇਕ-ਇਕ ਹਰ੍ਫ ਜਬੀੰ ਪਰ ਉਭਰ ਆਯਾ ਹੋਗਾ

ਉਸ ਨੇ ਘਬਰਾ ਕੇ ਨਜਰ ਲਾਖ ਬਚਾਈ ਹੋਗੀ
ਮਿਟ ਕੇ ਇਕ ਨਕ੍ਸ਼ ਨੇ ਸੌ ਸ਼ਕ੍ਲ ਦਿਖਾਈ ਹੋਗੀ
ਮੇਜ ਸੇ ਜਬ ਮੇਰੀ ਤਸ੍ਵੀਰ ਹਟਾਈ ਹੋਗੀ
ਹਰ ਤਰਫ ਮੁਝ ਕੋ ਤਡਪਤਾ ਹੁਆ ਪਾਯਾ ਹੋਗਾ

ਬੇਮਹਲ ਛੇਡ ਪੇ ਜਜ੍ਬਾਤ ਉਬਲ ਆਯੇ ਹੋੰਗੇ
ਗਮ ਪਸ਼ੇਮਾ ਤਬਸ੍ਸੁਮ ਮੇੰ ਢਲ ਆਯੇ ਹੋੰਗੇ
ਨਾਮ ਪਰ ਮੇਰੇ ਜਬ ਆਸੂ ਨਿਕਲ ਆਯੇ ਹੋੰਗੇ
ਸਰ ਨ ਕਾਧੇ ਸੇ ਸਹੇਲੀ ਕੇ ਉਠਾਯਾ ਹੋਗਾ

ਜੁਲ੍ਫ ਜਿਦ ਕਰ ਕੇ ਕਿਸੀ ਨੇ ਜੋ ਬਨਾਈ ਹੋਗੀ
ਰੂਠੇ ਜਲਵੋੰ ਪੇ ਖਿਜਾ ਔਰ ਭੀ ਛਾਈ ਹੋਗੀ
ਬਰ੍ਕ ਆਖੋੰ ਨੇ ਕਈ ਦਿਨ ਨ ਗਿਰਾਈ ਹੋਗੀ
ਰੰਗ ਚੇਹਰੇ ਪੇ ਕਈ ਰੋਜ ਨ ਆਯਾ ਹੋਗਾ

ਹੋਕੇ ਮਜਬੂਰ ਮੁਝੇ ਉਸ ਨੇ ਭੁਲਾਯਾ ਹੋਗਾ
ਜਹਰ ਚੁਪ ਕਰ ਕੇ ਦਵਾ ਜਾਨ ਕੇ ਖਾਯਾ ਹੋਗਾ

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