कैफी आज़मी Shayari in Hindi गुरुदत्त के लिए नोहा

Advertisement

Kaifi Azmi shayari – Gurudat ke liye noha

रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई

डरता हूँ कहीं ख़ुश्क न हो जाए समुन्दर
राख अपनी कभी आप बहाता नहीं कोई

Advertisement

इक बार तो ख़ुद मौत भी घबरा गई होगी
यूँ मौत को सीने से लगाता नहीं कोई

माना कि उजालों ने तुम्हें दाग़ दिए थे
बे-रात ढले शम्अ बुझाता नहीं कोई

साक़ी से गिला था तुम्हें मय-ख़ाने से शिकवा
अब ज़हर से भी प्यास बुझाता नहीं कोई

हर सुब्ह हिला देता था ज़ंजीर ज़माना
क्यूँ आज दिवाने को जगाता नहीं कोई

अर्थी तो उठा लेते हैं सब अश्क बहा के
नाज़-ए-दिल-ए-बेताब उठाता नहीं कोई

कैफी आज़मी के ये बेहतरीन 25 शेर आपके दिल को गहराइयों तक छू लेंगे

Kaifi Azmi Poetry – Gurudat ke liye noha

rahane ko sada dahar men aata nahin koi
tum jaise gae aise bhi jaata nahin koi

darata hoon kahin khushk n ho jaae samundar
raakh apani kabhi aap bahaata nahin koi

ik baar to khud maut bhi ghabara gai hogi
yoon maut ko sine se lagaata nahin koi

maana ki ujaalon ne tumhen daag die the
be-raat dhale shama bujhaata nahin koi

saaki se gila tha tumhen may-khaane se shikavaa
ab jhar se bhi pyaas bujhaata nahin koi

har subh hila deta tha janjir jmaanaa
kyoon aaj divaane ko jagaata nahin koi

arthi to utha lete hain sab ashk baha ke
naaj-e-dil-e-betaab uthaata nahin koi

Kaifi Azmi – Gurudat ke liye noha (in Urdu)

رَہَنے کو سَدا دَہَرَ میں آتا نَہِیں کوئی
تُمَ جَیسے گاے اَیسے بھِی جاتا نَہِیں کوئی

ڈَرَتا ہُوں کَہِیں خُشْکَ نَ ہو جائے سَمُنْدَرَ
راکھَ اَپَنِی کَبھِی آپَ بَہاتا نَہِیں کوئی

اِکَ بارَ تو خُدَ مَوتَ بھِی گھَبَرا گاِی ہوگِی
یُوں مَوتَ کو سِینے سے لَگاتا نَہِیں کوئی

مانا کِ اُجالوں نے تُمْہیں داغَ دِئے تھے
بے-راتَ ڈھَلے شَمْءاَ بُجھاتا نَہِیں کوئی

ساقِی سے گِلا تھا تُمْہیں مَیَ-خانے سے شِکَوا
اَبَ زَہَرَ سے بھِی پْیاسَ بُجھاتا نَہِیں کوئی

ہَرَ سُبْہَ ہِلا دیتا تھا زَںجِیرَ زَمانا
کْیُوں آجَ دِوانے کو جَگاتا نَہِیں کوئی

اَرْتھِی تو اُٹھا لیتے ہَیں سَبَ اَشْکَ بَہا کے
نازَ-اے-دِلَ-اے-بیتابَ اُٹھاتا نَہِیں کوئی

Kaifi Azmi – Gurudat ke liye noha (in Punjabi)

ਰਹਨੇ ਕੋ ਸਦਾ ਦਹਰ ਮੇੰ ਆਤਾ ਨਹੀੰ ਕੋਈ
ਤੁਮ ਜੈਸੇ ਗਏ ਐਸੇ ਭੀ ਜਾਤਾ ਨਹੀੰ ਕੋਈ

ਡਰਤਾ ਹੂ ਕਹੀੰ ਖੁਸ਼੍ਕ ਨ ਹੋ ਜਾਏ ਸਮੁਨ੍ਦਰ
ਰਾਖ ਅਪਨੀ ਕਭੀ ਆਪ ਬਹਾਤਾ ਨਹੀੰ ਕੋਈ

ਇਕ ਬਾਰ ਤੋ ਖੁਦ ਮੌਤ ਭੀ ਘਬਰਾ ਗਈ ਹੋਗੀ
ਯੂ ਮੌਤ ਕੋ ਸੀਨੇ ਸੇ ਲਗਾਤਾ ਨਹੀੰ ਕੋਈ

ਮਾਨਾ ਕਿ ਉਜਾਲੋੰ ਨੇ ਤੁਮ੍ਹੇੰ ਦਾਗ ਦਿਏ ਥੇ
ਬੇ-ਰਾਤ ਢਲੇ ਸ਼ਮ੍ਅ ਬੁਝਾਤਾ ਨਹੀੰ ਕੋਈ

ਸਾਕੀ ਸੇ ਗਿਲਾ ਥਾ ਤੁਮ੍ਹੇੰ ਮਯ-ਖਾਨੇ ਸੇ ਸ਼ਿਕਵਾ
ਅਬ ਜਹਰ ਸੇ ਭੀ ਪ੍ਯਾਸ ਬੁਝਾਤਾ ਨਹੀੰ ਕੋਈ

ਹਰ ਸੁਬ੍ਹ ਹਿਲਾ ਦੇਤਾ ਥਾ ਜੰਜੀਰ ਜਮਾਨਾ
ਕ੍ਯੂ ਆਜ ਦਿਵਾਨੇ ਕੋ ਜਗਾਤਾ ਨਹੀੰ ਕੋਈ

ਅਰ੍ਥੀ ਤੋ ਉਠਾ ਲੇਤੇ ਹੈੰ ਸਬ ਅਸ਼੍ਕ ਬਹਾ ਕੇ
ਨਾਜ-ਏ-ਦਿਲ-ਏ-ਬੇਤਾਬ ਉਠਾਤਾ ਨਹੀੰ ਕੋਈ

kaifi azmi poems in hindi
kaifi azmi poetry in urdu
kaifi azmi poems in english
kaifi azmi ghazal
kaifi azmi nazm
kaifi azmi sher
kaifi azmi ki shayari
shayari of kaifi azmi in hindi
kaifi azmi two line shayari
kaifi azmi best shayari
kaifi azmi shayari in urdu
kaifi azmi hindi shayari
shayari by kaifi azmi
shayari by kaifi azmi in hindi
kaifi azmi ki shayari in hindi

Advertisement