कर जाते हो व्यथा भार लघु, बार-बार कर-कंज बढ़ाकर में कौनसा अलंकार है?

कर जाते हो व्यथा भार लघु, बार-बार कर-कंज बढ़ाकर में कौनसा अलंकार है?

कर जाते हो व्यथा भार लघु, बार-बार कर-कंज बढ़ाकर में कौनसा अलंकार है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिये।

कर जाते हो व्यथा भार लघु, बार-बार कर-कंज बढ़ाकर में रूपक अलंकार है। इस पंक्ति में कवि ने ईश्वर की महत्ता को बताते हुए कहा है कि तुम हर बार किरण रूपी अपने सुंदर हाथों को बढ़ाकर जीवन की व्यथा को कम कर देते हो।

इस पंक्ति में उपमेय सूरज की किरणों पर सुंदर हाथों के उपमान को आरोपित किया गया है। सूरज की किरनें और सुंदर हाथ में भेद नहीं है इसलिए रुपक अलंकार है।

इस उदाहरण में जहां जहां पर उपमेय और उपमान आए हैं, वो हमने विद्यार्थियों की सहायता के लिए नीचे लिख दिये हैं:-

उपमेय – उपमान

सूरज की किरणें – सुंदर हाथ

जहां किन्हीं दो व्यक्ति या वस्तुओं में इतनी समानता हो कि दोनों में अंतर करना मुश्किल हो जाए वहां रूपक अलंकार होता है।

अथवा जहां उपमेय उपमान का रूप धारण कर ले वहां रूपक अलंकार होता है। रूपक अलंकार अर्थालंकार का एक प्रकार है।

कर जाते हो व्यथा भार लघु, बार-बार कर-कंज बढ़ाकर में रूपक अलंकार से संबन्धित प्रश्न परीक्षा में कई प्रकार से पूछे जाते हैं। जैसे कि – यहाँ पर कौन सा अलंकार है? दी गई पंक्तियों में कौन सा अलंकार है? दिया गया पद्यान्श कौन से अलंकार का उदाहरण है? पद्यांश की पंक्ति में कौन-कौन सा अलंकार है, आदि।

कर जाते हो व्यथा भार लघु, बार-बार कर-कंज बढ़ाकर पंक्तियों में रूपक अलंकार के अलावा और कौन सा अलंकार उपस्थित है?

कर कंज में अनुप्रास अलंकार , बार-बार में पुनरावृति अलंकार, कर और कर में यमक अलंकार, कर – हाथ

Important Alankar in Hindi अलंकार के उदाहरण एवं हिन्दी अलंकार पर प्रश्न जो परीक्षा में पूछे जा सकते हैं।

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