कृष्णा सोबती होगी सम्मानित साहित्य के क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से…

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हिंदी की लेखिका कृष्णा सोबती यह पुरस्कार साल 2017 के लिए दिया जाएगा. साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें 53वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा.इस पुरस्कार स्वरुप 92 वर्षीय सोबती को 11 लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिह्न प्रदान किया जाएगा.

कृष्णा सोबती का जन्म १८ फ़रवरी १९२५, गुजरात अब पाकिस्तान में हैं वह हुआ . सोबती हिन्दी की कल्पितार्थ (फिक्शन) एवं निबन्ध लेखिका हैं.

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उन्हें १९८० में साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा १९९६ में साहित्य अकादमी अध्येतावृत्ति से सम्मानित किया गया था.वो अपने उपन्यास मित्रो मरजानी के लिए जानी जाती हैं.

कृष्णा अपनी संयमित अभिव्यक्ति और सुथरी रचनात्मकता लेखन के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने हिंदी की कथा भाषा को विलक्षण ताज़गी़ दी है.उनके भाषा संस्कार के घनत्व, जीवंत प्रांजलता और संप्रेषण ने हमारे वक्त के कई पेचीदा सत्य उजागर किए हैं.

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उन्होंने कई कहानियों, उपन्यासों से हिंदी साहित्य को कई आयाम दिए हैं.उनकी कृतियों में डार से बिछुड़ी, मित्रो मरजानी, यारों के यार, तिन पहाड़, बादलों के घेरे, सूरजमुखी अंधेरे के,जिंदगीनामा, ऐ लड़की,दिलोदानिश,हम हशमत भाग,और समय सरगम शामिल है.

अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि किसी भी व्यक्ति की अपनी निज की ‘स्पेस’ को अगर अकेलेपन से न जोड़ा जाये अगर जोड़ेंगे, तो रचना और रचनाकार का बहुत कुछ गड़बड़ा जाएगा.रचनाओं का जन्म अकेलेपन में ही होता हैं.रचना जब तक लिखी नहीं जा रही होती,तब तक वह एक बड़ी दुनिया का हिस्सा होती है.

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