क्या अविवाहित कन्या को मंगला गौरी का व्रत करना चाहिए?

Kya avivahit kanya ko mangla gauri ka vrat karna chahiye?

उत्तर: मंगला गौरी का व्रत श्रावण मास के मंगलवार से प्रारम्भ करके पाँच वर्ष तक नियमित करके फिर इसका उद्यापन करें। मंगला गौरी का व्रत विवाह के बाद प्रत्येक स्त्री को पाँच वर्षों तक करना चाहिए। विवाहित स्त्री अपने सौभाग्य, पुत्र, पौत्रों को वृद्धि के लिय यह व्रत करती हैं। जैसा कि मंगला गौरी के संकल्प में बोला जाता है-

‘मम पुत्र पौत्र सौभाग्य वृद्धये श्री मंगला गौरी प्रीत्यर्थ

पंचवर्ष पर्यन्तं मंगलागौरी व्रतमहं करिष्ये।’

इस प्रकार यह व्रत चूँकि अपने सौभाग्य (पति के आयुष्य) की कामना से किया जाता है, फिर यह व्रत कुंवारी कन्या कैसे कर सकती हैं तथा शास्त्रों में विविध – धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु, व्रत भास्कर, व्रतपर्वोत्सव अंक (कल्याण)’ आदि में स्पष्ट रूप में लिखा है कि यह व्रत विवाहित स्त्री को करना चाहिए। अतः अविवाहित स्त्री (कुंवारी लड़की) को यह व्रत नहीं करना चाहिए।