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हिन्दी लोकोक्तियाँ क्लास 9, Lokoktiyan for class 9 

कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए हमने कुछ प्रमुख लोकोक्तियाँ संकलित की हैं जो परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी हैं। विद्यार्थी इन लोकोक्तियों का अभ्यास कर परीक्षा में पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

  क्लास हिन्दी लोकोक्तियाँ

  1. लोकोक्तिअब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत
    अर्थसमय निकलने पर पछताने से कोई लाभ नहीं
    वाक्य प्रयोग -तुम्हें कितना समझाया पढ़ लो अन्यथा परिणाम बुरा होगा अब मायूस होने से क्या लाभ । तुमने वह कहावत तो सुनी होगीअब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।

    2. लोकोक्तिअकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता
    अर्थअकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता।
    वाक्य प्रयोग- सब मिलकर काम करेंगे तो हम जल्द ही इस प्रोजेक्ट को पूरा कर लेंगे तुम अकेले क्यों लगे पड़े हो। अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

    3. लोकोक्तिहोनहार बिरवान के होत चिकने पात
    अर्थयोग्य और लायक की पहचान बचपन में ही हो जाती है।
    वाक्य प्रयोग-  क्रिकेट के प्रति उसके शौक को देखकर यह लगता है कि वह क्रिकेट में बहुत अच्छा करेगा होनहार बिरवान के होत चिकने पात।

    4. लोकोक्तिकोयले की दलाली में मुंह काला
    अर्थबुरा काम बदनामी का कारण बनता है।
    वाक्य प्रयोग- यदि तुम तस्कर मोहन के साथ मिलकर काम करोगे तो जेल की हवा तो खानी ही पड़ेगी कोयले की दलाली में मुंह काला न हो यह कैसे संभव है।

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    5. लोकोक्तिघर का भेदी लंका ढाए
    अर्थआपस की फूट से ही हानि होती है।
    वाक्य प्रयोग-  अगर रमेश ने अपने भाइयों का साथ ना छोड़ा होता और प्रतिद्वंदी मोहन का साथ न दिया होता तो उनके पैतृक व्यवसाय को नुक्सान पहुंचाना असंभव था।रमेश ने घर का भेदी लंका ढाए का काम बखूबी किया है ।

    6. लोकोक्तिचमड़ी जाए पर दमड़ी ना जाए
    अर्थअत्यधिक कंजूस होना
    वाक्य प्रयोग- रामजी लाल का सामना जब लुटेरों से हुआ  तो मार खाकर भी उन्होंने अपना बटुआ उनके हवाले ना किया  लहूलुहान स्थिति में जब वो घर पहुंचे तो उनकी पत्नी ने उन्हें देख कर कहा चमड़ी चली जाए पर दमड़ी ना जाए।

    7. लोकोक्तिधोबी का कुत्ता घर का ना घाट का
    अर्थस्थाई ठिकाना होना
    वाक्य प्रयोग -जब से उसके अवैध रिश्तो का भंडाफोड़ हुआ है उसकी स्थिति धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का वाली हो गई है। कभी वह अपनी प्रेमि दोनोंका के पास रहता है तो कभी अपनी पत्नी के पास ।

    8. लोकोक्तिना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी
    अर्थजिस कारण से अवांछित कार्य घटित हो रहा था उसे ही खत्म करना।
    वाक्य प्रयोग- विनीत के दोनों बेटे अभी छोटे थे और घर में एक ही साईकिल थी।दोनों बच्चों में इस बात के लिए रोज झगड़े होते  यह देख कर विनीत ने  साइकिल उठा कर कहीं रख दिया और कहा ना रहेगा बांस ना रहेगी बांस ना बजेगी बांसुरी अब जाओ दोनों खेलो।

    9. लोकोक्तिनाच ना जाने आंगन टेढ़ा
    अर्थगुण होने पर साधन को दोष देना।
    वाक्य प्रयोग- बुनाई का डिजाइन पूछने के लिए सरला बिरला के पास गई तो विमला ने कहा अभी तो उसकी आंखों में तेज दर्द हो रहा है इसलिए वह नहीं बता सकती तब विमला ने कहा बहाने न बनाओ नाच ना जाने आंगन टेढ़ा की कहावत सुन रखी है मैंने।

    10. लोकोक्तिमान मान मैं तेरा मेहमान
    अर्थजबरदस्ती जान पहचान बढ़ाना।
    वाक्य प्रयोग- अपना काम निकालने के लिए सोहन किसी से भी दोस्ती कर लेता है उसकी इस आदत को देखकर सभी उसे मान ना मान ना मान मैं तेरा मेहमान का कट चिढाते हैं ।

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    11.  लोकोक्तिपूत के पांव पालने में दिख जाते हैं
    अर्थकाबिलियत आरंभ से ही दिखने लगती है।
    वाक्य प्रयोग- मां के प्रति अतिशय लगाव को देखकर यह कहा जा सकता है कि वह बड़ा होकर मां-बाप की खूब सेवा करेगा क्योंकि पूत के पांव पालने में दिख रहे हैं।
    12. लोकोक्तितुम डाल डाल हम पात पात
    अर्थएक दूसरे से बढ़कर होना।
    वाक्य प्रयोग- चलो तुम मुझसे करते हो क्या करते हो और तुम डाल-डाल हो तो मैं भी पात पात ही रहूंगा।

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