महात्मा गांधी के प्रेरक वचन Motivational quotes of Mahatma Gandhi

महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) बीसवीं शताब्दी के सबसे प्रसिद्ध महापुरुषों में से एक हुए हैं। उनका जीवन सादगी एवं उच्च चरित्र की एक ऐसी मिसाल ही जिससे आज लगभग 70 साल बाद भी भारत ही नहीं समस्त संसार के लाखों-करोड़ों लोग प्रेरणा प्राप्त करते आ रहे हैं। शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हुआ हो जो अपने जीवन में महान संत, स्वतंत्रता सेनानी, विचारक, दार्शनिक, सुयोग्य नेतृत्वकारी, समाज सुधारक और लेखक एक साथ हुआ हो। ऐसे महान पुरुष मोहन दास करम चंद गांधी, जिन्हें सारा विश्व महात्मा गांधी के नाम से जानता है, की जयंती 2 अक्टूबर को अपने पाठकों के लिए उनके कुछ प्रेरक वचन प्रस्तुत हैं।

महात्मा गांधी के अनमोल वचन Inspirational Quotes by Mahatma Gandhi

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – साहस (Courage)

कायरता से बेहतर है युद्ध में जान लेना या जान दे देना।

Better than cowardice is killing and being killed in battle.

भय का भी कोई लाभ हो सकता है लेकिन कायरता का कोई लाभ नहीं है।

Fear has its use but cowardice has none.

कायर व्यक्ति कभी क्षमा नहीं कर सकता, क्षमा केवल बहादुरों का ही गुण है।

The weak can never forgive. Forgiveness is the attribute of the strong.

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – कार्य (Action)

किसी भी कार्य को करने से पहले एक क्षण कर उस दीनहीन असहाय व्यक्ति का चेहरा याद करो जिसे तुमने देखा हो और खुद से सवाल करो कि जो कार्य मैं करने जा रहा हूँ उससे क्या उस व्यक्ति का भला हो सकेगा?

Before you do anything, stop and recall the face of the poorest most helpless destitute person you have seen and ask yourself, Is what I am about to do going to help him?

संतोष आपकी कोशिश में छुपा है, कार्यसिद्धि में नहीं। पूर्ण प्रयत्न ही पूर्ण सफलता है।

Satisfaction lies in the effort, not in the attainment, full effort is full victory.

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – सत्य (Truth)

अगर आप हजारों की भीड़ में भी अकेले, मगर सत्य के साथ हैं, सत्य सदा सत्य रहेगा।

Even if you are a minority of one, the truth is the truth.

सत्य से कभी किसी न्यायोचित उद्देश्य की हानि नहीं हो सकती।

Truth never damages a cause that is just.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – हिंसा एवं अहिंसा (Violence and Non-violence)

शान्ति का पुरस्कार स्वयं शान्ति है।

Peace is its own reward.

मैं हिंसा का विरोध करता हूँ क्यूंकि इससे होने वाला लाभ क्षणिक है किन्तु इससे होने वाली बुराई स्थाई होती है।

I object to violence because when it appears to do good, the good is only temporary; the evil it does is permanent.

एक आँख के बदले आँख की प्रतिशोध की भावना आखिर में सभी को अंधा करके ही छोड़ेगी।

An eye for eye only ends up making the whole world blind.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – शंका (Doubt)

अपने आत्मज्ञान पर अत्यधिक भरोसा भी समझदारी नहीं है। यह जानना चाहिए कि शक्तिशाली कमजोर और बुद्धिमान से भी गलती हो सकती है।

It is unwise to be too sure one’s own wisdom. It is healthy to be reminded that the strongest might weaken and the wisest might err.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – विचार (Thought)

व्यक्ति को रात को सोने से पहले क्रोध को भूल जाना चाहिए।

Man should forget his anger before he lies down to sleep.

प्रसन्नता जीवन में तब मिलती है जब आपकी सोच, आपकी बोली और आपके कर्म – सभी परस्पर सामंजस्य में हों।

Happiness is when what you think, what you say and what you do are in harmony.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – विवेक (Conscience)

शांति की खोज अपने भीतर से प्रारम्भ कीजिये।

Each one has to find his peace from within.

ऐसे जियो जैसे मृत्यु कल ही आनी है। ऐसे सीखो जैसे तुम कभी मरोगे नहीं !

Live as if you were to die tomorrow. Learn as if you were to live forever.

शक्ति शारीरिक क्षमता से नहीं मापी जा सकती। शक्ति का सही पैमाना अटूट इच्छाशक्ति है।

Strength does not come from physical capacity. It comes from an indomitable will.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – स्वतंत्रता (Freedom)

जिस आजादी में गलती करने की आजादी न हो, वह आजादी जीने योग्य नहीं है।

Freedom is not worth having if it does not connote freedom to err.

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – बुराई (Evil)

संसार में हिंसा को जन्म देने वाली सात बड़ी बुराइयां हैं:

१. काम किये बिना धन-दौलत

२. विवेक के बिना सांसारिक सुख

३. चरित्र के बिना ज्ञान

४. नैतिकता के बिना व्यापार

५. मानवता के बिना विज्ञान

६. बलिदान के बिना धर्म

७. सिद्धांत के बिना राजनीति

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – समानता (Equality)

सौम्यता, स्व-बलिदान और उदारता जैसे गुणों पर विश्व में किसी एक जाति या धर्म का एकाधिकार नहीं है।

Gentleness, self-sacrifice and generosity are the exclusive possession of no one race or religion.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – प्रेम (Love)

जहाँ प्रेम है, वहीँ इश्वर है।

Where there is love there is God.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – मित्रता (Friendship)

अपने मित्रों के साथ मित्रता निभाना आसान है। लेकिन जो तुमसे शत्रुता रखता हो उस व्यक्ति को मित्र बनाना ही सही मायने में सच्चा धर्म है। अन्यथा मित्रता व्यापार के सिवा कुछ नहीं।

It is easy enough to be friendly to one’s friends. But to befriend the one who regards himself as your enemy is the quintessence of true religion. The other is mere business.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – धन-दौलत (Wealth)

संसार में मानव की जरूरत पूरी करने लायक सब कुछ है किन्तु लालच पूरा करने के लिए नहीं ।

There is a sufficiency in the world for man’s need but not for man’s greed.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – राजनीति (Politics)

राष्ट्र का निर्माण कर्मठता और पीड़ा के द्वारा होता है।

Nations are born out of travail and suffering

व्यक्ति जैसे जैसे अपने साथी मनुष्यों के भले के लिए काम करता जाता है उसका कद बढ़ता जाता है।

Man becomes great exactly in the degree in which he works for the welfare of his fellow men.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – शिक्षा (Education)

ऐसी साक्षरता का कोई मूल्य नहीं जो चरित्र निर्माण न कर सकती हो।

Literary education is of no value, if it is not able to build up a sound character.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – धर्म (Religion)

इश्वर के समक्ष व्यक्ति के भाग्य का फैसला उसके कर्मों के आधार पर होगा ना कि उसके इरादों से।

Before the throne of the Almighty, man will be judged not by his acts, but by his intentions. For God alone reads our hearts.

धर्म हृदय से जुड़ा मामला है।

Religion is a matter of the heart.

मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर टिका है। सत्य मेरे लिए ईश्वर है और अहिंसा उसे पाने का रास्ता।

My religion is based on truth and non-violence. Truth is my God. Non-violence is the means of realising Him

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – आस्था (Faith)

चिन्ता से ज्यादा शरीर का नाश कोई नहीं करता। जिसकी परमात्मा में आस्था है उसे किसी बात की चिंता भला क्यों चाहिए?

There is nothing that wastes the body like worry and one who has any faith in God should be ashamed to worry about anything whatsoever.

अहिंसा के लिए दोहरी आस्था होनी चाहिए, ईश्वर में आस्था और इंसान में आस्था।

Non-violence requires a double faith, faith in God and also faith in man.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – प्रार्थना (Prayer)

प्रार्थना के समय शब्दों से रहित हृदय होना बेहतर बनिस्बत हृदयहीन शब्दों के।

In prayer it is better to have a heart without words than words without a heart.

 

महात्मा गांधी के प्रेरक वचन – हास्य-विनोद (Humour)

यदि मुझमें हास्य-विनोद की भावना नहीं होती तो मैं कब का आत्महत्या कर चुका !होता

If I had no sense of humor, I would long ago have committed suicide.