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Mandir mein kya Karen, kya na Karen?

मंदिर के कण कण में कुछ छिपा है। हर वह व्यक्ति जो मंदिर में दर्शन लाभ के लिए आता है, अपने-अपने ढंग से अपने मतलब की चीज ढूंढ लेता है। लेकिन हिन्दु परंपरा के अनुसार मंदिर जाने पर भी अनेक ऐसे नियम हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना गया है। आइए जानते हैं कि मंदिर जाएँ तो क्या करें और क्या न करें?
o शरीर पर धारण की हुई चर्म की वस्तुएं उतार दें। देवालय के प्रांगण में जूते चप्पल पहनकर न जाएं उन्हें देवालय क्षेत्र के बाहर ही उतारें।
o देवालय के प्रांगण अथवा देवालय के बाहर जूते-चप्पल उतारने ही पड़ें, तो देवता की दाहिनी ओर उतारें।
o देवालय में व्यवस्था हो, तो पैर धो लें। हाथ में जल लेकर ‘अपवित्र, पवित्रो वा…’ ऐसा तीन बार बोलते हुए अपने संपूर्ण शरीर पर तीन बार जल छिडकें। देवालय में प्रवेश करने से पूर्व पुरुषों द्वारा अंगरखा उतारकर रखने की पद्धति हो, तो उस पद्धति का पालन करें।
o देवालय में दर्शन हेतु जाते समय पुरूष भक्तजनों को टोपी तथा स्त्री भक्तों को पल्लू से अपने सिर को ढ़कना चाहिए।
o देवालय के प्रवेश द्वार व गरूडध्वज को नमस्कार करें। प्रांगण से देवालय के कलश का दर्शन करें एवं कलश को नमस्कार करें।
o जहां तक संभव हो घंटानाद न करें। यदि नाद करना ही हो तो, अति मंदस्वर में ऐसे भाव से करें मानो घंटानाद से अपने आराध्य देवता को जगा रहें हों।
o शिवालय में पिंडी के दर्शन करने से पूर्व नंदी के दोनों सींगों को हाथ लगाकर नंदी के दर्शन करें।
o साधारणतः गर्भ गृह में जाने की मनाही होती है, परंतु कुछ देवालयों के गर्भ गृह में प्रवेश की सुविधा है। ऐसे में गर्भ गृह के प्रवेश द्वार पर श्री गणपति हों तो उन्हें नमस्कार करने के उपरांत ही गर्भगृह में प्रवेश करें।

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