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नई दिल्ली: कोयला खदान आवंटन मामले की सुनवाई करते हुए आज एक विशेष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राहत दी है. अदालत ने कहा कि मनमोहन सिंह के सामने गलत तथ्य रखे गए थे.

manmohan singh

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास यह मानने की कोई वजह नहीं थी कि तत्कालीन कोयला सचिव एच सी गुप्ता ने उनके सामने एक ऐसी कंपनी को मध्य प्रदेश में कोयला ब्लॉक आवंटित करने की सिफारिश की थी जो उस समय आवंटन के नियमों को पूरा नहीं करती थी।

जज ने कहा कि तत्कालीन कोयला सचिव ने प्रधानमंत्री के सामने गलत तथ्य रखे और मनमोहन सिंह को उन तथ्यों के आधार पर ही निर्णय लेना था. मनमोहन सिंह के पास उस समय कोयला मंत्रालय कर प्रभार था.

अदालत ने कहा कि मनमोहन सिंह को कोयला मंत्री के रूप में जांच समिति की सिफारिशों की फाइल भेजते समय यह उल्लेख नहीं किया गया था कि आवेदनों की उनकी पात्रता और पूर्णता के लिए जांच नहीं की गई है।

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उस समय कोयला सचिव एच सी गुप्ता थे, गुप्ता 31 दिसंबर, 2005 से नवंबर, 2008 तक कोयला सचिव रहे थे। अदालत ने इस कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितताओं के लिए एच सी गुप्ता के साथ कोयला मंत्रालय में तत्कालीन संयुक्त सचिव के एस क्रोफा और तत्कालीन निदेशक के सी समारिया को दोषी ठहराया है।

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