मनमोहन सिंह या नरेंद्र मोदी- प्रधानमंत्री के रूप में कौन बेहतर?

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तुलना विश्व के महान अर्थशास्त्रियों से की जाती है. उन्हें देश का सबसे शिक्षित PM भी कहा गया परन्तु UPA-2 के शासनकाल के दौरान लगातार उजागर हुए घोटालों ने उनकी छवि पर बट्टा लगा दिया.

modi manmohan

सरकार बदली और प्रधानमंत्री बने श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी.

3 साल बीत चुके हैं और अब भारत की जनता नरेंद्र मोदी की तुलना मनमोहन सिंह से करने लगी है. चाहे वो महंगाई का मुद्दा हो या देश के विकास का, लोगों का यह तुलनात्मक वार्तालाप रोचक बनने लगा है.

आइये देखते हैं कि डॉक्टर मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी की उपलब्धियां क्या क्या हैं तथा इन दोनों में से किसने खुद को देश के लिए अच्छा साबित किया है.

भ्रष्टाचार

2014 चुनावों में भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा था जिसपर मनमोहन सिंह भी बुरी तरह विफल दिखें. विपक्ष सहित पूरे देश ने उन्हें बुरी तरह कोसा था. 2G स्कैम, कोयला घोटाला सहित बड़े बड़े घोटालों ने मनमोहन सिंह की प्रतिष्ठा पर बड़ा प्रश्न खड़ा किया था.

हालाँकि इस मुद्दे पर नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार 3 सालों के बाद भी साफ़ दिख रही है. जो की प्रशंसनीय है.

हालाँकि बात भ्रष्टाचार की करें तो इसे रोकने के लिए नरेंद्र मोदी ने जो उपाय किये वो अबतक नाकाफी दिख रहे हैं. भ्रष्ट देशों की रैंकिंग में भारत का स्थान 84वा था जो नरेंद्र मोदी के आने के बाद 2015 में सुधरकर 76 हुआ परन्तु 2016 में फिर से गिरकर 79 होगया.

पूरे देश को मोदी सरकार से कहीं ज्यादा उम्मीदें थीं.

औद्योगिक उत्पादन

विदेशी दौरे को ले कर अक्सर चर्चा में रहने वाले प्रधानमंत्री मोदी पर जब लगातार इस मामले पर सवाल उठने लगे तब अमित शाह ने उनका बचाव करते हुए कहा था कि मोदी जी के विदेशी दौरों की संख्या मनमोहन सिंह के बराबर ही है. परन्तु जांच करने पर आंकड़े कुछ और ही कहानी बयान करते हैं.

आंकड़ों के अनुसार UPA-1 के कार्यकाल में पहले 3 सालों में मनमोहन सिंह ने कुल 27 देशों का दौरा किया वहीँ UPA-2 के कार्यकाल में उन्होंने 36 देशों का भ्रमण किया. परन्तु नरेंद्र मोदी ने अपने प्रथम 3 सालों में कुल 49 देशों का भ्रमण किया.

बात यदि विकास की करें तो मनमोहन सिंह के विदेशी दौरों से देश के विकास दर पर सीधा असर दिखता था परन्तु नरेंद्र मोदी के दौरों से हुए फायदे का देश को अबतक इंतज़ार है.

GDP तथा विकास दर

मनमोहन सिंह के 10 साल के कार्यकाल में देश का GDP विकास दर लगभग 7.7% रहा जबकि विश्व ने इसी दौरान वैश्विक आर्थिक मंदी भी देखी परन्तु भारत का विकास दर इन सभी से अछूता रहा.

वहीँ प्रधानमंत्री मोदी के शाशनकाल में GDP लगातार गिरावट देखी गयी है. जब मोदी को सत्ता मिली तब जीडीपी 6.4 % की दर से विकास कर रही थी परन्तु उसके बाद मोदी जी ने जैसे ही नोटबंदी की घोषणा की, देश का विकास दर लगातार लुढ़कता चला गया. हालाँकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस बात पर देश को आगाह करते हुए चेताया था कि आने वाले दिनों में देश की विकास दर में 2% की गिरावट आने वाली है. और अंततः हुआ भी वही.

टैक्स और महंगाई

प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता में आने के बाद स्वच्छ भारत टैक्स तथा किसान कल्याण टैक्स के नाम पर जनता पर टैक्स का भार तो बढ़ाया परन्तु इन दोनों ही क्षेत्रों में कोई ख़ास विकास नहीं दिखा.

इतना ही नहीं पेट्रोल तथा डीजल के दामों में 50% से भी अधिक का टैक्स लगाया जा रहा है जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रहीं हैं और इसका सीधा असर महंगाई पर दिख रहा है.

मनमोहन सिंह ने अधिकतम 18% टैक्स स्लैब के साथ GST लाने का प्रस्ताव रखा तब नरेंद्र मोदी सहित भाजपा ने इसका कड़ा विरोध किया. परन्तु सत्ता में आने के बाद भाजपा में इसी GST को 28% के अधिकतम टैक्स स्लैब के साथ पास कर दिया.

बेरोजगारी

साल 2009 से 2011तक जब देश 8.5% की दर से विकास कर रहा था तब कुल 9.5 लाख नौकरियों का सृजन हुआ था परन्तु भाजपा ने इसे जाबलेस ग्रोथ बताते हुए मनमोहन सिंह पर यह कह के प्रहार किया था कि ऐसी प्रगति का क्या फायदा जिसमें नौकरियाँ ही पैदा न हों.

परन्तु आज सत्ता में आने के बाद भाजपा सिर्फ 2 लाख वार्षिक रोजगार पैदा कर पा रही है जो कि सोचनीय है. 2 करोड़ रोजगार पैदा करने का वादा दे कर सत्ता में आये प्रधानमंत्री मोदी मुश्किल से 2 लाख रोजगार पैदा कर पाए. और इसी बीच लगातार हो रही छटनियों ने भी सरकार के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं.

हालाँकि यह बात गौर करने लायक है कि अभी नरेंद्र मोदी को सत्ता में आये सिर्फ तीन साल ही हुए हैं और उनकी नीतियों को कारगर होने में कुछ और समय लग सकता है.

यह समय ही बताएगा की भारत को सर्वाधिक फायदा इन दोनों में से किसके कार्यकाल में हुआ. परन्तु पाठकगण कमेंट के माध्यम से अपनी राय जरूर रख सकते हैं

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