Samvad Lekhan मेट्रो रेल में यात्रा करते हुए पिता और पुत्र के बीच में संवाद- संवाद लेखन

Metro rail mein yatra karte hue pita aur putra ke beech mein samvad- Samvad Lekhan

वरुण : पिताजी आज मेट्रो रेल में यात्रा करने का मेरा सपना पूरा हो रहा है।

पिताजी : तुम्हे पता है बेटा दिल्ली में २४ दिसम्बर २००२ को मेट्रो रेल शुरू हुई थी ।

वरुण : पिताजी ये मेट्रो रेल तो अब लगभग पूरी दिल्ली में ही चलती है इसके आसपास और कहाँ-कहाँ पर चलती है यह ?

पिताजी : बेटा यह गुड़गाँव, नोएडा और गाजियाबाद में भी चलती है ।

वरुण : पिताजी यह मेट्रो रेल तो और रेलों के मुकाबले तेज चल रही है ना ?

पिताजी : हाँ बेटा ।यह अधिकतम ८० किलोमीटर प्रति घंटा से चलती है । तभी तो लोग अपने गंतव्य पर सड़क यात्रा के मुकाबले कहीं जल्दी पहुँच जाते हैं और समय बचने के कारण लोग इसी में सफ़र करना पसंद करते हैं । तुम्हे पता है रोज की यात्रा करने वाले इसमें पास बनवा कर यात्रा करते हैं इससे समय की भी बचत होती है और पैसे की भी ।

वरुण : और पिताजी, मजे की बात है कि इसमें एयर कंडीशनर भी लगा हुआ है । कितना मजा आ रहा है इसमें यात्रा करने में ।

पिताजी : हाँ बेटा तुम आराम से बैठकर यात्रा का आनंद लो । मैंने आखरी स्टेशन तक का टिकट लिया हुआ है ।

वरुण : पिताजी इसमें तो सामने लिखा हुआ भी आ रहा है कि अगला स्टेशन कौन सा है और यह भी पता चल रहा है कि दरवाजा दाहिनी तरफ खुलेगा या बाईं तरफ ।

पिताजी : बेटा, तभी तो ये जनता की पसंदीदा रेल है । तुम्हे पता है बेटा यह रेल हर स्टेशन पर लगभग २० सेकंड ही रूकती है ।

वरुण : हाँ पिताजी, इसमें यात्रा करने में तो बहुत मजा आ रहा है ।

पिताजी : लो बातों-बातों में पता ही नहीं चला और आखिरी स्टेशन भी आ गया ।

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