मोहनी मूरत साँवरी सूरत, नैना बने बिसाल में कौनसा अलंकार है?

मोहनी मूरत साँवरी सूरत, नैना बने बिसाल में कौनसा अलंकार है?

प्रश्न – मोहनी मूरत साँवरी सूरत, नैना बने बिसाल में कौनसा अलंकार है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिये।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है। इस काव्य पंक्ति में एक नहीं बल्कि तीन वर्णों की आवृत्ति हो रही है । वर्णों की आवृत्ति से कविता में चमत्कार उत्पन्न हो रहा है।

इस पंक्ति में अनुप्रास अलंकार का कौन सा भेद हैं?

इस काव्य पंक्ति में छेकानुप्रास का प्रयोग हुआ है। जब काव्य में एक या एक से अधिक वर्णों की आवृति होती है तो वहाँ छेकानुप्रास का होता है। म, स,और ब की आवृत्ति हुई है इसलिए यहाँ छेकानुप्रास है।

जैसा कि आपने इस उदाहरण में देखा जहां पर किसी वर्ण के विशेष प्रयोग से पंक्ति में सुंदरता, लय तथा चमत्कार उत्पन्न हो जाता है उसे हम शब्दालंकार कहते हैं।

अनुप्रास अलंकार शब्दालंकार का एक प्रकार है। काव्य में जहां समान वर्णों की एक से अधिक बार आवृत्ति होती है वहां अनुप्रास अलंकार होता है।

मोहनी मूरत साँवरी सूरत, नैना बने बिसाल में अलंकार से संबन्धित प्रश्न परीक्षा में कई प्रकार से पूछे जाते हैं। जैसे कि – यहाँ पर कौन सा अलंकार है? दी गई पंक्तियों में कौन सा अलंकार है? दिया गया पद्यान्श कौन से अलंकार का उदाहरण है? पद्यांश की पंक्ति में कौन-कौन सा अलंकार है, आदि।

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