अपने 5 बच्चों की जिंदगी गंवाकर 100 हिंदुओं की जान बचा गया ये मुसलमान. देश कर रहा सलाम

कहते हैं इंसानियत से बड़ा कोई मजहब नहीं होता। ये बात रिक्शा चालक सिराजुद्दीन ने साबित कर दी। आनुवांशिक बीमारी ‘गौचर’ से अपने पांच बच्चों को गंवाने वाले रिक्शा चलाक सिराजुद्दीन ने सैकड़ों की जिंदगी बचाने की व्यवस्था कर दी है।

उनके ना हारने वाले हौसले के चलते 7000 तरह की आनुवांशिक और दुर्लभ बीमारियों के निशुल्क इलाज के लिए कानून बन गया है।

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सिराजुद्दीन अपने बीमार बच्चों को लेकर जब भी अस्पताल गए, उन्हें सिर्फ इतना बताया गया कि इलाज पर हर माह लाखों का खर्च होगा। पैसों के अभाव के चलते सिराजुद्दीन के पांच बच्चों की एक के बाद एक मौत हो गई।

सिराजुद्दीन को उस वक्त अपनी दुनिया उजड़ती नजर आई जब उन्हें पता चला कि उनकी आखिरी संतान अहमद भी ‘गौचर’ से पीड़ित है। सिराजुद्दीन ने अपने बेटे की जिंदगी बचाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एक अधिवक्ता की मदद से केंद्र व दिल्ली सरकार के खिलाफ कानूनी जंग छेड़ते हुए उन्होंने बेटे के निशुल्क इलाज की मांग की।

उनकी इस कानूनी जंग का नतीजा यह हुआ कि न सिर्फ उनका बेटा ठीक हो गया, बल्कि 7000 रोगों के निशुल्क इलाज का कानून भी बन गया।

गौचर एक जन्मजात बीमारी है। इसमें मरीज का लिवर बढ़ जाता है। इलाज के लिए एन्जाइम का इंजेक्शन दिया जाता है। मौजूदा समय में इलाज पर 5 से 7 लाख रुपये का खर्च आता है। इसकी सभी दवाइयां विदेशों से मंगानी पड़ती हैं।

सिराजुद्दीन की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 जनवरी, 2014 को गौचर व अन्य आनुवांशिक व दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित मरीजों के निशुल्क इलाज के लिए केंद्र व दिल्ली सरकार को नीति बनाने का आदेश दिया था।

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हाईकोर्ट के आदेश के बाद 25 मई, 2017 को केंद्र ने कानून बनाते हुए इन बीमारियों से लड़ने के लिए 100 करोड़ का कोष तैयार किया। मरीजों के इलाज पर 60% रकम केंद्र, जबकि 40% खर्च राज्य सरकार द्वारा गठित कोष से दिया जाएगा।

11 अगस्त 2017 को हाईकोर्ट में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव बताएंगे कि बिना किसी परेशानी के दुर्लभ बीमारी से पीड़ित मरीज इस कानून का लाभ कैसे ले सकेंगे।

हाईकोर्ट ने सरकार को इसकी पूरी प्रक्रिया बताने का निर्देश दिया था। अब देशभर में गौचर, फेबरी,पाम्पे, एमपीएस-1 सहित हजारों तरह की बीमारियों के निशुल्क इलाज हो सकेगा। आम तौर पर इन बीमारियों का इलाज कराने के लिए लाखों खर्च होते हैं।