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फ्रांस में अतिवृष्टि के कारण एक नदी में बाढ़ आ गई। शाम का समय था। एक किशोर नदी के किनारे किनारे चलता हुआ अपने गांव की ओर जा रहा था।

एकाएक उसकी दृष्टि नदी पर बने बांध की ओर गई। उसने देखा कि बांध में मामूली छेद होने से पानी रिस रहा था।

napoleonवह सोचने लगा, यदि इसी तरह पानी बहता रहा तो कुछ समय पश्चात पूरा गांव ही जलमग्न हो जाएगा। उसने मिट्टी से उस छेद को भर दिया लेकिन पानी का बहना तब भी बंद नहीं हुआ, बल्कि छेद और बड़ा होता जा रहा था।

फिर उसने सोचा कि जब तक गांव जाकर सूचना दूंगा तक तक तो यह बांध टूट भी सकता है। यही सोचकर वह उस छेदवाले स्थान पर कमर सटाकर लेट गया और सारी रात इसी तरह लेटा रहा।

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उधर घर न पहुंचने पर उसके माता-पिता को चिंता होने लगी। रात जैसे तैसे काटकर वह भोर में ही नदी किनारे की ओर चल पड़े। उस लड़के ने अपने माता पिता को निकट बुलाकर कहा कि आप लोग गांव में जाकर पानी रोकने की व्यवस्था करने के लिए लोगों से कहें। उसके माता-पिता ने गांव में जाकर पानी रोकने की व्यवस्था करवाई।

फ्रांस की सरकार ने उस बालक को उसके साहस, देशभक्ति व वीरता के लिए सम्मानित किया। उस देशभक्त बालक का नाम था नेपोलियन, जो बाद में फ्रांस का शासक बना।

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