नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा की 9 मंत्रों से करें पूजा, पूरी होगी मनोकामना

Navratri ke 9 din Maa Durga ki 9 mantro se karen Puja, manokamna puri hogi

नवरात्रि के शुभ अवसर पर सभी माँ के 9 रूपों की पूजा करेंगे, व्रत रखेंगे और सात्विक जीवन व्यतीत भी करेंगे। नवरात्रि आरंभ होते ही भक्तों की सबसे बड़ी तमन्ना होती है कि वे मां दुर्गा के व्रत एवं पूजन विधि को सही तरीके से कर सकें। क्योंकि, ऐसी मान्यता है कि यदि व्रत एवं पूजन विधि पूर्वक हो जाए तो मां प्रसन्न होकर मनोकामना पूर्ण करती हैं। नवरात्रि के व्रत के नियम इतने भी कठोर नहीं जितना लोग बताते हैं। यदि आप में थोड़ा भी संयम है तो आप इन्हें जरूर निभा लेंगे। नियमानुसार स्नान एवं पूजा के बाद आप पूरा दिन कोई भी तामसिक भोजन ना लें। अन्न ग्रहण करना वर्जित है, केवल वही खाद्य पदार्थ खाएं जो व्रत के अनुसार सही है।

Navratri mein Maa Durga Puja ke 9 mantraयूं तो भूख बर्दाश्त की जा सकती है, यदि ना भी हो तो आप थोड़ी-थोड़ी देर बाद फल खा सकते हैं। वैसे भक्तों में यह आम मान्यता प्रचलित है कि शक्ति स्वरूप मां स्वयं ही भक्तों को व्रत की परीक्षा में सफल होने की शक्ति प्रदान करती हैं। लेकिन फिर भी भक्तों के बीच एक इच्छा दिखाई देती है, मां की पूजा सही तरीके से करने की। तो इसमें हम आपकी एक मदद कर सकते हैं। आगे की स्लाइड्स में क्रमानुसार मां के नौ रूपों के साथ एक-एक मंत्र दिया गया है, यदि इस मंत्र का आप शई उच्चारण के साथ पूजा के साथ जाप करें, तो मां आपकी हर इच्छा पूरी करेंगी।

क्रमानुसार सबसे पहले पहाड़ों की देवी मां शैलपुत्री का दिन होता है। अच्छी सेहत और हर प्रकार के भय से मुक्ति दिलाती हैं मां शैलपुत्री। इनकी आराधना से स्थिर आरोग्य और जीवन निडर होता है। व्यक्ति चुनौतियों से घबराता नहीं बल्कि उसका सामना करके जीत हासिल करता है।

मां शैलपुत्री का मंत्र इस प्रकार है – “विशोका दुष्टदमनी शमनी दुरितापदाम्। उमा गौरी सती चण्डी कालिका सा च पार्वती।।“ इसका जाप सही उच्चारण के साथ ही करें। जाप के साथ आप मां को दूध का भोग लगा सकते हैं।

दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी का होता है, जिनका व्रत एवं पूजन करने से बुद्धि का विकास होता है। ऐसी मान्यता है कि मां ब्रह्माचारिणी, जिन्हें मां भगवती भी कहा जाता है वह अपने भक्त को जीवन से जुड़ी हर परीक्षा पास करने की शक्ति प्रदान करती हैं।

ब्रह्मचारिणी का परीक्षा में सफलता दिलाने का मंत्र – “विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः।।“

देवी का तीसरा रूप है मां चंद्रघण्टा… जिनके संदर्भ में यह मान्यता प्रचलित है कि वे जीवन में आए संकट के हर एक बादल को हटाने में मदद करती हैं। मां अपने भक्तों को मुश्किल की घड़ी में भी आशा की एक किरण दिखाती हैं, तथा अंतत: भक्त सफल हो जाता है। मां चंद्रघण्टा का मंत्र – “हिनस्ति दैत्य तेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत्। सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योsनः सुतानिव।।“

संतान के सुख की प्राप्ति के लिए एवं परिवार में शांति बनी रहे, इसके लिए देवी के चतुर्थ रूप का पूजन किया जाता है। मां कुसुमाण्डा का मंत्र – “स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रयात्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता। करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः।।“

अगर आप चाहते हैं कि आपकी बुद्धि और बातचीत से हर कोई प्रभावित हो, तो इसके लिए पांचवी देवी मां स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए। मां स्कंदमाता का मंत्र इस प्रकार है – “सौम्या सौम्यतराशेष सौम्येभ्यस्त्वति सुन्दरी। परापराणां परमा त्वमेव परमेश्वरी।।“

किसी का विवाह नहीं हो रहा या फिर वैवाहिक जीवन में कुछ परेशानी है तो उसे शक्ति के इस स्वरूप की पूजा अवश्य करनी चाहिए। मां कात्यायनी का दाम्पत्य दीर्घसुख प्राप्ति मंत्र – “एतत्ते वदनं सौम्यम् लोचनत्रय भूषितम्। पातु नः सर्वभीतिभ्यः कात्यायिनी नमोस्तुते।।“

दुश्मनों से जब आप घिर जाएं, हर ओर विरोधी नज़र आएं, तो ऐसे में आपको माता कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से हर तरह की शत्रुबाधा से मुक्ति मिलेगी। मां कालरात्रि का शत्रुबाधा मुक्ति मंत्र – “त्रैलोक्यमेतदखिलं रिपुनाशनेन त्रातं समरमुर्धनि तेपि हत्वा। नीता दिवं रिपुगणा भयमप्यपास्त मस्माकमुन्मद सुरारिभवम् नमस्ते।।“

अगर आपके मन में बहुत ऐश्वर्य और प्रसिद्धि पाने की इच्छा हो तो आठवें दिन मां महागौरी की आराधना करें। इनकी कृपा से व्यक्ति देखते-देखते मशहूर हो जाता है। मां महागौरी का परम ऐश्वर्य सिद्धि मंत्र – “सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।“

अगर आप अपनी हर इच्छा पूरी करना चाहते हैं तो 9वें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करें। माता की कृपा से आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है। सर्वमनोकामना पूरक महागौरी मंत्र – “या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजन प्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्।।“