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नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन में कौन सा अलंकार है?

नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन में कौन सा अलंकार है?


नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन में कौन सा अलंकार है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिये।
नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन में उपमा अलंकार है क्योंकि यहाँ भगवान विष्णु की तुलना नील कमल और लाल कमल से की गई है।

नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन में उपमेय, उपमान, समान धर्म एवं वाचक को स्पष्ट कीजिये

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उपमेय – जिसकी उपमा दी जाय। उपर्युक्त पंक्ति में भगवान विष्णु उपमेय है।

उपमान – जिस प्रसिद्ध वस्तु या व्यक्ति से उपमा दी जाती है। उपर्युक्त पंक्ति में नील कमल और लाल कमल उपमान है।

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समान धर्म – उपमेय-उपमान की वह विशेषता जो दोनों में एक समान है। उपर्युक्त उदाहरण में कमल से साम्यता समान धर्म है।

वाचक शब्द – वे शब्द जो उपमेय और उपमान की समानता प्रकट करते हैं। उपर्युक्त उदाहरण में समान वाचक शब्द है।

नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन में उपमा अलंकार का कौन सा भेद है?

नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन में उपमा का भेद है – पूर्णोपमा

उपमा अलंकार- जब काव्य में किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी अत्यंत प्रसिद्ध वस्तु या व्यक्ति से की जाती है तो उसे उपमा अलंकार कहते हैं

सा, से, सी, सम, समान, सरिस, इव, समाना आदि कुछ अन्यवाचक शब्द है।

उपमा अलंकार के तीन भेद हैं–पूर्णोपमा, लुप्तोपमा और मालोपमा।

(क) पूर्णोपमा – जहाँ उपमा के चारों अंग विद्यमान हों वहाँ पूर्णोपमा अलंकार होता है;

जैसे-
हरिपद कोमल कमल से”

(ख) लुप्तोपमा – जहाँ उपमा के एक या अनेक अंगों का अभाव हो वहाँ लुप्तोपमा अलंकार होता है;

जैसे-
“पड़ी थी बिजली-सी विकराल।
लपेटे थे घन जैसे बाल”।

(ग) मालोपमा – जहाँ किसी कथन में एक ही उपमेय के अनेक उपमान होते हैं वहाँ मालोपमा अलंकार होता है।

जैसे-
“चन्द्रमा-सा कान्तिमय, मृदु कमल-सा कोमल महा
कुसुम-सा हँसता हुआ, प्राणेश्वरी का मुख रहा।।”

उपमा अलंकार के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर जाएँ:

उपमा अलंकार – परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

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