दिल्ली:नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रोज़ाना सिर्फ 50 हज़ार श्रद्धालुओं को ही ऊपर माता के दर्शन के लिए जाने दिया जाएगा. यह फैसला पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप लिया है.

25-30 साल में वैष्णों देवी में तीर्थ यात्रियों की संख्या में जबरदस्त इज़ाफ़ा हुआ है. 1991 में वैष्णो देवी जानेवालों की संख्या 30 लाख 50 हज़ार थी जो अब बढ़कर एक करोड़ के करीब हो गई है.

हालांकि एनजीटी के इस फैसले से जम्मू में स्थित कटरा के माता वैष्णो देवी तीर्थस्थान की देखभाल करने वाली श्राइन बोर्ड भी खुश है क्योंकि बोर्ड खुद भी पहले ही रोजाना इस संख्या से अधिक श्रद्धालुओं को दर्शनों करने की अनुमति नहीं दे रहा है.

एनजीटी के फैसले की हिन्दू संगठनों और सोशल मीडिया ने आलोचना की है.फैसले के विरोध में एक यूजर लिखते हैं, ‘इस रोक का क्या मतलब है? भविष्य में एनजीटी हिंदू धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं के जाने पर रोक लगाने जा रहा है.।’

हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चक्रपाणि महाराज ने एनजीटी के फैसले को हिन्दुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा कि ऐसा किसी नियम के तहत करना गलत है.

इस पर कुछ कथित हिंदू संगठनों ने एनजीटी को खत्म या बर्खास्त करने की मांग की है. एक यूजर ने एनजीटी को उखाड़ फेंकने की बात कही है. जबकि एक यूजर लिखते हैं, ‘इस रोक का क्या मतलब है? भविष्य में एनजीटी हिंदू धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं के जाने पर रोक लगाने जा रहा है.’

एनजीटी ने ये फैसला किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए लिया है. एनजीटी ने यह भी कहा है कि वैष्णो देवी में पैदल चलने वालों और बैटरी से चलने वाली कारों के लिए एक विशेष रास्ता 24 नवंबर से खुलेगा.