पासपोर्ट री- वेरीफ़िकेशन बस किसी समूह विशेष तक सिमित नहीं होना चाहिए,”मुस्लिम नेताओ की राय…

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उत्तर प्रदेश में देवबंद में पुलिस जल्द ही पासपोर्ट धारकों का दोबारा वेरीफ़िकेशन करने जा रही है.एक रिपोर्ट्स केअनुसार पुलिस को यह जानकारी मिली थी कि देवबंद और उसके आस-पास के इलाकों में कुछ लोग चरमपंथी गतिविधियों में लिप्त हो सकते हैं और उनके पास फ़र्ज़ी पासपोर्ट भी हो सकते हैं.

एक वेबसाइट पर दिए इंटरव्यू मे सहारनपुर के ज़िला अधिकारी पी के पांडे ने  इस खबर की पुष्टि की हैं इससे ज़्यादा कुछ नहीं बताया.

पूर्व राज्य सभा सांसद और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव महमूद मदनी के अनुसार  उन्होंने कहा कि उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते सभी का वेरीफ़िकेशन हो रहा हो.

मदनी के अनुसार ”अगर पुलिस को लगता है कि किसी के पास फ़र्ज़ी पासपोर्ट है,तो वह उसे वेरीफ़ाई करने का काम कर सकती है, बस यह किसी समूह विशेष पर लागू नहीं होना चाहिए.”

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पुलिस किस तरह वेरीफ़िकेशन की इस प्रकिया को पूरा करती है. एक आदमी किस तरह अपने पासपोर्ट को पुलिस से दोबारा वेरीफ़ाई करवाएगा, यह बाद में ही पता लगेगा, लेकिन अभी तो इसमें कोई एतराज़ नहीं है.”

कुछ महीनो पहले उत्तर प्रदेश एटीएस ने मुज़फ़्फ़रनगर से एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ़्तार किया था. वह लंबे समय से देवबंद में रह रहा था.

देवबंद स्थित इस्लामी संस्था दारुल उलूम के एक सामाजिक कार्यकर्ता के अनुसार ”पासपोर्ट री-वेरीफ़िकेशन करना सरकार का एक काम है, लेकिन इसके लिए किसी को परेशान नहीं किया जाना चाहिए.”

‘पिछले के कुछ दिनों में ऐसी बातें निकलकर आ रही थी, पासपोर्ट री-वेरीफ़िकेशन जरूरी हो गया था,लेकिन एक तबका समझ रहा हैं की कही इस री-वेरीफ़िकेशन के पीछे मुस्लिम युवाओं को टारगेट करने की कोशिश तो नहीं हो रही हैं .”

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फ़िलहाल पुलिस की तरफ़ से कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.री-वेरीफ़िकेशन की प्रकिया कैसी और कब शुरू किया जाएगा.

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