Samvad Lekhan पेड़ों के महत्व पर पिता और पुत्र के बीच संवाद – संवाद लेखन

Pedon ke mahtva par pita aur putra ke beech samvad-Samvad Lekhan

पिताजी : अरे अनिल, इतना मगन होकर अखबार में क्या पढ़ रहे हो ?

अनिल : पिताजी, आजकल समाचार पत्र में रोज ही ग्लोबल वार्मिंग को लेकर कोई ना कोई खबर या लेख जरूर होता है । बस मैं वही पढ़ रहा था ।

पिताजी : बेटा, ग्लोबल वार्मिंग तो होगी ही । लोगों ने अपने विकास के लिए पेड़ों को काटना जो शुरू कर दिया है । लोगों को लगता है कि इस तरह के विकास से वे आराम से जीवन जी लेंगे ।

अनिल : जी पिताजी । हमारे सामने जो मकान है वहाँ पहले कितने पेड़ थे। पर उन लोगों ने एक-आध पेड़ छोड़ कर सारे पेड़ कटा दिए और पक्का फर्श बना दिया जिससे सफाई करने में आसानी हो ।

पिताजी ¬¬¬ : बेटा अगर तुम उनके घर जाकर देखोगे तो उनके घर का तापमान हमारे घर के तापमान से ज्यादा ही होगा क्योंकि पेड़ गर्मी को अवशोषित कर लेते हैं और छाया भी देते हैं ।

अनिल : जी पिताजी हमारी अध्यापिका ने हमें बताया था की पेड़ वर्षा करने में भी सहायता करते हैं और जल स्तर को भी बनाये रखते हैं ।

पिताजी : बेटा, पेड़ों के कारण ही कई प्रकार के जीव-जंतुओं का अस्तित्व भी है जिसके कारण हमारा पारिस्थिति तंत्र भी संतुलित रहता है । आज तुम जिन पेड़ों का आनंद ले रहे हो ये तुम्हारे दादाजी के लगाए हुए हैं । इसलिए बेटा भविष्य की पीढ़ी के लिए हमें ही कदम उठाना होगा । यदि किसी कारण से आपको पेड़ काटने भी पड़े तो सुनिश्चित करना चाहिए की हम उतने ही पेड़ लगायेंगे भी ।

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