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Purane samay mein 100 sal se jyada kaise jeete the?

जन्म और मृत्यु के संबंध में आज भी यही कहा जाता है कि किसी भी व्यक्ति का जन्म और मृत्यु दोनों ही परमात्मा पर निर्भर हैं। वर्तमान समय में इंसान की औसत आयु लगभग 60 वर्ष मानी जा रही है, जबकि प्राचीन काल में इंसान सैकड़ों साल जीवित रहते थे। इसके पीछे कई स्वास्थ्य संबंधी कारण मौजूद हैं।
काफी हद तक आज का वातावरण और खान पान इस बात के लिए जिम्मेदार है कि व्यक्ति की औसत आयु केवल 60 वर्ष रह गई है। पुराने समय में वातावरण और खान पान दोनों ही दृष्टि से काफी स्वास्थ्य वर्धक था। तब न तो वाहनों का धुआं होता था और न ही जंक फूड या आज के जैसा असंतुलित खाना।
शास्त्रों के अनुसार उस समय भोजन के चार प्रकार थे – भक्ष्य, भोज्य, चोप्य और लेहा। तब अधिकाँश लोगों का पंसदीदा आहार गेहूं और चावल ही था। चावल से बने पकवानों में घी में उबले चावल, दूध की खिचड़ी, चावल, दाल और चीनी क लड्डू, चावल के मालपुए, खीर आदि प्रचलित थे। शास्त्रों में कई स्थानों में घी का उल्लेख मिलता है। उस समय मांसाहार से कहीं अधिक शाकाहार को महत्व दिया जाता था। उस समय लोगों का आपसी व्यवहार भी प्रेममय होता था। पहले कई प्रकार के पूजनकर्म किए जाते थे, वे भी इंसान के स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखते थे। तब शतरंज, द्यूत, संगीत, नृत्य और नाटक, विहार, जलविहार, व्यायाम आदि मनोरंजन के साधन थे। वे लोग केवल प्राकृतिक वातावरण में ही निवास करते थे। इन सभी कारणों के चलते उन्हें बीमारियां होने की संभावनाएं बहुत कम रहती थी। रोगियों के लिए अच्छी औषधियां रहती थी, जो इंसानों से मृत्यु को दूर रखती थी। लोगों की आवश्यकताएँ सीमित होने के कारण तनाव रहित जीवन व्यतीत करते थे।

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