राफेल लड़ाकू विमान खरीद- जानिए इस डील के बारे में सब कुछ

राफेल लड़ाकू विमान को ले कर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरी की पूरी राफेल डील इसलिए बदल दी क्यूंकि वो सिर्फ एक बिजनेसमैन को फायदा पहुँचाना चाहते थे.

rafale deal

राफेल डील को लूट बताते हुए उन्होंने कहा BHEL को प्रोजेक्ट देने के बजाये मोदी जी ने रिलायंस कंपनी को फायदा पहुँचाया है. वहीँ रिलायंस ने धमकी दी है कि अगर कांग्रेस ये आरोप वापस नहीं लेती तो पार्टी पर केस किया जाएगा.

आइये जानते हैं कि क्या है ये राफेल डील.

UPA1 शासनकाल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वायु सेना के लिए 126 Medium Multi-Role Combat Aircraft (MMCRA) खरीदने हेतु टेंडर जारी किया.

फ़्रांसिसी कंपनी दस्सौल्ट राफेल ने 126 विमानों के लिए 54000 करोड़ रूपए के साथ सबसे कम मूल्य पर बिड किया. सरकार से हुए समझौते के अनुसार इस डील के अनुसार 18 विमान बने बनाये मिलेंगे जबकि बाकी को HAL (हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड) बनेगा जिसमें फ़्रांसिसी कंपनी दस्सौल्ट टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर के जरिये मदद करेगी. इससे HAL को राफेल विमान की टेक्नोलॉजी हासिल हो जाती.

मई 2014 में नयी सरकार के गठन के बाद इस डील को 30 जुलाई 2015 को रद्द कर दिया गया. और इसके बदले एक नयी डील तय हुई.

26 सितम्बर 2016 को नयी डील तय हुई जिसके अनुसार उसी कंपनी से 56000 करोड़ रूपए में 36 राफेल विमान खरीने का सौदा हुआ. और इस समझौते के लिए HAL की जगह अम्बानी की रिलायंस डिफेन्स लिमिटेड ने दस्सौल्ट एविएशन के साथ सहभागिता की.

कांग्रेस के 3 महत्वपूर्ण सवाल 

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के 3 साल सवाल हैं.

1. मनमोहन सिंह ने जब 526 करोड़ प्रति विमान के हिसाब से डील तय की थी तो उसी डील को रद्द कर के 1570 करोड़ प्रति विमान की दर से डील क्यूँ की गयी? जबकि विमान वही है तथा कंपनी भी वही है?

2. इस डील को हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड, जो की पब्लिक सेक्टर कंपनी है, उससे छीन कर रिलायंस डिफेन्स, जो कि एक प्राइवेट कंपनी है, को देने की क्या जरूरत थी? रिलायंस की बजाये HAL को यह प्रोजेक्ट क्यूँ नहीं सौंपा गया? 

3. पुराने डील के दौरान हमें ट्रान्सफर ऑफ़ टेक्नोलॉजी मिल रही थी जिससे HAL उस विमान की टेक्नोलॉजी को सीख पाती. इस नए डील में ऐसा कुछ भी नहीं है. क्यूँ?

भाजपा-रिलायंस की प्रतिक्रिया 

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रिलायंस डिफेन्स ने कांग्रेस से अपना बयान वापस लेने को कहा है, इनकार करने पर लीगल एक्शन लेने की भी बात कही गयी है.

साथ ही साथ इस मुद्दे पर खबर लिखने के लिए रिलायंस डिफेन्स की तरफ से कुछ प्रमुख मीडिया एजेंसियों पर मुंबई हाई कोर्ट में मुकदमा दायर भी हुआ है.

वहीँ भाजपा ने इन सभी आरोपों को आधारहीन बताते हुए कहा है कि कांग्रेस लोगों का ध्यान 3600 करोड़ के ऑगस्टा वेस्टलैंड घोटाले से हटाने के लिए यह मीडिया स्टंट कर रही है.