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Rahim ke dohe दुख नर सुनि हांसी करै, धरत रहीम न धीर।

Rahim ke dohe in Hindi:

दुख नर सुनि हांसी करै, धरत रहीम न धीर।
कही सुनै, सुनि सुनि करै, ऐसे वे रघुबीर।।

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Dukh nar suni haansi karai, dharat Rahim na dheer
Kahi sunai suni suni karai, aise ve raghubir

रहीम के दोहे का अर्थ:

आखिर मनुष्य अपना दुख किसे सुनाए? तय है, वह अपनी कारूणिक स्थिति का वर्णन अपनो से ही करेगा। संकट के समय में अपनों से ही आशा होती है कि वह सांत्वना व सहयोग देंगे और अपनों का यही कर्तव्य भी है। किंतु वे दुख दर्द की बात सुनकर क्या करते हैं?

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रहीम कहते हैं, लोग कितने पाषाण हदय हो गए हैं। उसने दुख दर्द कहो तो कोई धीरज के दो बोल नहीं बोलता, बल्कि लोग पीठ पीछे हंसते और मजाक उड़ाते हैं। ऐसे लोगों के सामने मन की पीड़ा दर्शाने से क्या लाभ? इससे तो यह अच्छा है कि रघुवीर की शरण में जाओ, उन्हें अपना दुख दर्द सुनाओ। रघुवीर ऐसे सुहदय और कृपालु हैं कि वे सबकी विपदा सुनते हैं और शीघ्र उसका निदान करते हैं।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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