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Rahim ke dohe कहि रहीम इक दीप तें, प्रगट सबै दुति होय।

Rahim ke dohe in Hindi:

कहि रहीम इक दीप तें, प्रगट सबै दुति होय।
तन सनेह कैसे दुरै, दुग दीपक जरू होय।।

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Kahi rahim ek deep ten, pragat sabai duti hoy
Tan saneh kaise durai, dug Deepak jaru hoy

रहीम के दोहे का अर्थ:

आंखों के हाव भाव मन का सारा भेद प्रकट कर देते हैं। मन में दुख है या सुख, बातों या मुंह के हाव भाव से भले ही इसे छिपाने में सफलता मिल जाए, किंतु आंखें शीघ्र बता देती हैं कि मन की स्थिति कैसी है? कोई लाख मौन रहे, उसकी आंखे मुखर होती हैं।

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रहीम कहते हैं, केवल एक दीप के प्रज्जवलित होने से चारों ओर प्रकाश छा जाता है। कमरे के कोने कोने को जगमगाने के लिए एक दीप ही पर्याप्त है। पर तन को तो आंखों के दो दीप उपलब्ध हैं, ऐसी स्थिति में तन का कोना कोना आलोकित होकर सबको सहज नजर आ सकता है। यदि चित्त प्रीतभाव से हर्षित है तो आंखों के दीप की चमक इस भेद को शीघ्र प्रकट कर देती है।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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