Rahim ke dohe मोहन छवि नैनन बसी, पर छवि कहां समाय।

Rahim ke dohe in Hindi:

मोहन छवि नैनन बसी, पर छवि कहां समाय।
भरी सराय रहीम लखि, पथिक आप फिरि जाय।।

Mohan chhavi nainan basi, par chhavi kahan samaay
Bhari saraay rahim lakhi, pathik aap fir jay

रहीम के दोहे का अर्थ:

रहीम मुसलमान होते हुए भी कृष्ण के अनन्य भक्त थे। इस दोहे में वह बताते हैं कि वह मोहन के रूप से इस प्रकार प्रभावित हैं कि उन्हें किसी अन्य का रूप सुहाता ही नहीं।

रहीम के शब्दों में, मोहन को जबसे देखा है, उनकी छवि आंखों में बस गई है। इस छवि में आंखें यों रच बस गई हैं कि अब कोई अन्य छवि उनमें समाती ही नहीं। जिस प्रकार भरी सराय देखकर पथिक स्वयं वापस लौट जाता है, उसी प्रकार मोहन की छवि से दोनों आंखें पूरी तरह भर गई हैं, अब किसी अन्य छवि को वहां स्थान दे पाना संभव नहीं।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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