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Rahim ke dohe रहिमन अंसुआ नैन ढरि, जिय दुख प्रगट करेइ।

Rahim ke dohe in Hindi:

रहिमन अंसुआ नैन ढरि, जिय दुख प्रगट करेइ।
जाहि निकारो गेह ते, कस न भेद कह देह।।

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Rahiman ansua nayan dhari, jiy dukh pragat karei
Jahi nikaaro geh te, kas na bhed kah dei

रहीम के दोहे का अर्थ:

हदय में जो घनीभूत पीड़ा छाई होती है, वह आंसू बनकर छलकर पड़ती है और चित्त का सारा भेद प्रकट कर देती है। अतः व्यक्ति को धैर्यवान होना चाहिए। उसे दुर्दिनों में भी आंसू पीने की क्षमता रखनी चाहिए और उसे मन का भेद किसी के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए। वस्तुतः आंसू देखकर कोई दुख बांटने नहीं आता, बल्कि लोगों पर मन की क्षीणता प्रकट हो जाती है और वह उपहास का पात्र बन जाता है।

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रहीम कहते हैं, यह सच है कि आंखों से आंसू छलकते हैं तो हदय का दर्द प्रकट कर ही देते हैं। किंतु मन का भेद जग जाहिर करना हानिप्रद है। कोई भी उसका अनुचित लाभ उठा सकता है। चुगलखोर आंसू ठीक उसी पारिवारिक सदस्य की तरह होते हैं, जिसे घर से निकाल दिया जाए तो वह घर का भेद अवश्य सबको बता देता है।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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