Rahim ke dohe रहिमन अति न कीजिये, गहि रहिये निज कानि।

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Rahim ke dohe in Hindi:

रहिमन अति न कीजिये, गहि रहिये निज कानि।
सैजन अति फूले तऊ, डार पात की हानि।।

Rahiman ati na keejiye, gahi rahiye nij kaani
Saijan ati foole tau, daar paat kee hani

रहीम के दोहे का अर्थ:

अति हमेशा हानिकाकर होती है। गुब्बारे में आवश्यकता से अधिक हवा भरी जाए तो उसका फूटना निश्चित है। दवा-दारू के सेवन में अति की जाए तो व्याधियों का षिकार होते देर नहीं लगती। सर्वाधिक नाशक है अहंकार की अति। यह किसी अन्य का अपकार नहीं करती, स्वयं अहंकारी इससे बरबाद होता है। अतः सदैव मर्यादा का पालन करना चाहिए।

रहीम कहते हैं, अति कभी नहीं करनी चाहिए। अति करने से सिवाय हानि के कुछ और प्राप्त नहीं होता। अपनी सीमाओं में रहने में ही सुरक्षा है, सीमा का अतिक्रमण नई समस्याओं को आमंत्रित करता है। अति के बजाय मर्यादा का पालन करना चाहिए। मर्यादा का उल्लंघन करने से स्थिति सहजन के फूल जैसी हो सकती है। सहजन फूलने में जब अति करता है तो अपने ही पेड़ की डालियों व पत्तियों को हानि पहुंचाता है।

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Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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