Rahim ke dohe रहिमन ओछे नरन सों, बैर भलो ना प्रीति।

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Rahim ke dohe in Hindi:

रहिमन ओछे नरन सों, बैर भलो ना प्रीति।
काटे चाटै स्वान के, दोऊ भांति विपरीति।।

Rahiman ochhe naran soun, bair bhalo na preeti
Kaate chaate swan ke, doun bhaanti vipreeti

रहीम के दोहे का अर्थ:

हमारा कौन बैरी है और कौन मित्र, यह हम भलीभांति जानते हैं। दोनों खुलकर अपने व्यवहार का प्रदर्शन करते हैं। किंतु ओछे आदमी का कोई विश्वास नहीं होता। वह कब मित्र के वेश में अपनी दुश्मनी निभा जाए, कहा नहीं जा सकता।

इस बारे में सतर्क करते हुए रहीम कहते हैं, ओछे पुरूषों से हमेशा सावधान रहना चाहिए। उनके मनोभावों को समझ पाना कठिन है। अतः न उनसे मित्रता भली है और न दुश्मनी। वे न प्रीति के योग्य होते हैं और न बैर के। उनके और कुत्ते के व्यवहार में कोई अंतर नहीं होता। कुत्ते का काटना-चाटना दोनों ही खतरनाक हैं। वह चाटते-चाटते कब काट लेगा, कोई नहीं जानता।

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Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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