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Rahim ke dohe राज करत रजपूतनी, देस रूप को दीप।

Rahim ke dohe in Hindi:

राज करत रजपूतनी, देस रूप को दीप।
कर घूंघट पर ओट कै, आवत पियहि समीप।।

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Raj karat rajpootni, des roop ko deep,
Kar ghoonghat par ot kai, aavat piyanhi sameep

रहीम के दोहे का अर्थ:

मुगल सम्राट अकबर का राजपूताने के अनेक राजाओं से मधुर संबंध था। रहीम कई बार अकबर के प्रतिनिधि के रूप में राजपूताने गए थे। वह वहां की नारियों के शील व वीरता से अत्यधिक प्रभावित हुए थे। इस दोहे में रहीम ने ऐसी ही एक नारी के चरित्र का वर्णन प्रस्तुत किया है।

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रहीम कहते हैं, राजपूतनी का चरित्र विलक्षण है। भले ही उसे राज गद्दी न मिली हो, किंतु महल में उसी का राज चलता है। उसी के रूपदीप से सारा देश प्रदीप्त है। उसे कुल की मर्यादा का आभास है। अतः जब वह पिया के समीप आती है, तब मुख को घुंघट की ओट में कर लेती है।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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