Rahim ke dohe रीति प्रीति सब सों भली, बैर न हित मित गोत।

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Rahim ke dohe in Hindi:

रीति प्रीति सब सों भली, बैर न हित मित गोत।
रहिमन याही जनक की, बुरि न संगति होत।।

Reeti preeti sab soun bhalee, bair na hit mit got,
Rahiman rahi janak kee, burin a sangati hot

रहीम के दोहे का अर्थ:

मेल मिलाप से ही जीवन व्यतीत करना सुखद है। लड़ते झगड़ते या बैर करते हुए जीवन व्यतीत करने का कोई अर्थ नहीं है। ऐसी स्थिति में चित्त सदैव अशांत रहता है। इसका भी कोई भरोसा नहीं होता कि कब कौन धोखे से वार करे अथवा षड्यंत्र में धन गंवाना पड़े। मैत्रीभाव में रहते समय मस्तिष्क को कोई दुष्चिंता नहीं सताती। वह शांति एवं उत्साह से खुद भी जीता है, दूसरों को भी जीने देता है।

रहीम कहते हैं, सबसे उत्तम रीति है प्रीति की। अतः सबके साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करने में ही लाभ है। हितैषियों, मित्रों व कुल परिवार वालों को कभी दुश्मनी मोल नहीं लेनी चाहिए। इनका सान्निध्य मिला है तो इससे अलग होने का प्रयास करना हानिप्रद है। यह जो संगति मिली है, वह इसी जन्म की है। अगले जन्म के फेर में मत पड़ो, पता नहीं अगले जन्म में इनकी मित्रता मिले न मिले। अतः इस जन्म में जिनकी मित्रता प्राप्त है, उसको निभाना चाहिए।

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Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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