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Rahim ke dohe in Hindi:

तन रहीम है कर्म बस, मन राखो ओहि ओर।
जल में उलटी नाव ज्यों, खैंचत गुन के जोर।।

Tan rahim hai karm bas, man rakho ohi aur
Jal mein ulti naav jyon, khainchat gun ke jor

रहीम के दोहे का अर्थ:

मनुष्य जग में अवतरित होता है तो जीवनयापन के लिए कर्म करना पड़ता है। भरण पोषण के लिए कर्म के बिना गति नहीं। व्यक्तिगत व पारिवारिक आवश्यकताएं कर्म से ही परिपूर्ण होती हैं। किंतु कर्म में संपूर्णतः संलिप्ति उचित नहीं। तन का काम कर्म करना है तो मन से परलोक संवारने के लिए उद्योग करना चाहिए।

रहीम कहते हैं, तन कर्म के वश में है। तन को अपनी अपनी आवश्यकताओं के अनुसार कर्मों में संलग्न होना पड़ता है। तन को अपने कर्म करने चाहिए, किंतु उनमें पूरी तरह लिप्त होना अहितकर है। यदि सांसरिक कर्मों में तन के साथ मन भी जोड़ दिया गया तो मनुष्य मोह माया के जाल में फंसकर परलोक को बिगाड़ देता है।

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अतः मन को कर्मों की विपरीत दिशा में लगाना चाहिए। मन को सदैव भगवान के ध्यान में लगाकर रखना यही मन का कर्म है। मन को कर्मों से बलपूर्वक उसी तरह उलटी दिशा की ओर (भगवान की ओर) ले जाना चाहिए, जिस प्रकार जल की विपरीत दिशाओं में नाव को रस्सी के जोर से खींचा जाता है।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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